'कोचिंग संस्थानों को नहीं, माता-पिता को दोषी ठहराया जाना चाहिए', कोटा स्टूडेंट्स सुसाइड पर SC
राजस्थान के कोटा में बढ़ते स्टूडेंट्स के सुसाइड मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आत्महत्याओं के लिए कोचिंग संस्थानों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। स्टूडेंट्स के माता-पिता की बढ़ती उम्मीदें बच्चों पर अनुचित दबाव डाल रही हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने निजी कोचिंग संस्थानों के नियमन और उनके मापदंड तय करने की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह बातें कहीं। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि कोटा में कोचिंग संस्थानों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में माता-पिता अपने बच्चों पर अनुचित दबाव डाल रहे हैं, जिसके कारण स्टूडेंट्स सुसाइड कर रहे हैं।

कोर्ट ने आगे कहा कि आत्महत्याएं कोचिंग संस्थानों की वजह से नहीं हो रही हैं। ये इसलिए होती हैं, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौतों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि परीक्षाएं बहुत प्रतिस्पर्धी हो गई हैं और माता-पिता को बहुत उम्मीदें हैं। स्टूडेंट्स ऐसी परीक्षाओं में आधे अंक या एक अंक से हार जाते हैं और दबाव का सामना करने में सक्षम नहीं होते हैं।
कोर्ट ने आगे कहा कि हालांकि, हममें से ज्यादातर लोग नहीं चाहेंगे कि वहां कोई कोचिंग संस्थान हो, लेकिन स्कूलों की स्थितियों को देखें। वहां कड़ी प्रतिस्पर्धा है और स्टूडेंट्स के पास इन कोचिंग संस्थानों में जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। हालांकि, जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि यह एक नीतिगत मुद्दा है और हम राज्यों को नीति बनाने का निर्देश नहीं दे सकते। कोर्ट द्वारा सरकार के समक्ष अभ्यावेदन देने के लिए कहने के बाद याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका वापस ले ली।
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