बिल लटकाने पर राज्यपालों को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, कहा- या तो हां करें नहीं तो तुरंत लौटा दें
Supreme Court vs Governor: तेलंगाना सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने पीठ से कहा कि निर्वाचित विधायक राज्यपालों की दया पर निर्भर हैं।

राज्यपालों द्वारा राज्य सरकारों के बिल को लटकाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने संविधान का हवाला देते हुए अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपालों को संविधान का हवाला देते हुए कहा कि बिल पर अगर सहमति हो तुरंत हां कर दें यदि नहीं हो तो जितनी जल्दी हो सके लौटा दें। इसे लटाकाया जाना नहीं चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के पहले प्रावधान को प्रभावी करने के लिए विधेयकों को जितनी जल्दी हो सके लौटा दिया जाना चाहिए।
तेलंगाना सरकार ने की थी शिकायत
दरअसल, तेलंगाना सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि निर्वाचित विधायक राज्यपालों की 'दया' पर निर्भर हैं। राज्यपाल कई दिनों तक विधेयक लंबित करके रखते हैं जिससे बिल पास होने में देरी होती है। हालांकि, राज्यपाल पहले ही स्पष्टीकरण दे चुके थे कि उनके पास कोई बिल लंबित नहीं है। तेलंगाना के राज्यपाल के कार्यालय ने 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत को बताया था कि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित तीन विधेयकों को मंजूरी दे दी गई थी और दो विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार और सहमति के लिए रखा गया है।
हमारा यह निर्देश सभी संस्थाओं के लिए: सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारा यह निर्देश सिर्फ राज्यपालों के लिए नहीं है बल्कि सभी संवैधानिक संस्थाओं के लिए है। अदालत ने कहा कि संविधान का नियम कहता है कि सभी फैसले समय के साथ होना चाहिए। बता दें कि पिछले महीने इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
दिल्ली और पंजाब में भी देखने को मिले थे मामले
बता दें कि यह पहला मामला ऐसा नहीं है क्योंकि कुछ दिन पहले ऐसा ही मामला पंजाब में भी आया था, जब राज्यपाल ने पंजाब मंत्रिमंडल के सदन की बैठक बुलाने के आग्रह को मंजूरी नहीं थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ये मंजूरी दे दी गई थी। इसी तरह दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच भी इसी तरह की तकरार देखने को मिलती हैं।












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