सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा- वापस आए प्रवासियों को दें रोजगार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रवासी मजदूरों के मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को प्रवासी श्रमिकों को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि, हम सभी मजदूरों को वापस पहुंचाने के लिए 15 दिन दे सकते हैं। राज्य हमें बताएं कि जो लोग घर वापस लौट रहे हैं उन्हें रोजगार देने का क्या इंतजाम है। वापस लौटे श्रमिकों के लिए राज्य सरकारें रोजगार का सृजन करें।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में गुजरात की ओर से कहा गया कि 22 लाख में से अब सिर्फ ढाई लाख मजदूरों को वापस भेजना बाकी है। जबकि महाराष्ट्र ने कहा कि 11 लाख मजदूरों को भेजा जा चुका है अब सिर्फ 38 हजार बचे हैं।यूपी की तरफ से कहा गया कि हम लोगों से किराया नहीं ले रहे। 104 ट्रेन चलाई गई। 1.35 लाख लोगों को अलग-अलग साधन से वापस भेजा।
राज्यों की बात सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य गांव और प्रखंड के स्तर पर अपने यहां वापस लौटे मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करें। उन्हें रोजगार देने की व्यवस्था करें। उनकी परेशानी दूर करने के लिए काउंसिलिंग भी करें। अदालत ने सभी राज्यों से मजदूरों का रिकॉर्ड मांगा है और साथ ही उन्हें रोजगार देने, राहत देने की रिपोर्ट मांगी है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, इसके अलावा सभी सरकारें ये भी बताएं कि वो प्रवासी मजदूरों के लौटने पर उनके रोजगार और अन्य सुविधाओं के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।
आपको बता दें कि देश में 24 मार्च को लॉकडाउन लगाया गया था, जिसके बाद प्रवासी मजदूरों को काफी परेशानी हुई थी। जिसके बाद कई जगहों पर काम बंद होने के कारण प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घर की ओर चल पड़े थे। जिसके चलते दर्जनों मजदूरों की मौत हो गई थी। मजदूरों को हो रही परेशानी को देखते हुए बाद सरकार की ओर से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। सरकार की ओर से 4270 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, इनमें अधिकतर ट्रेनें सिर्फ यूपी-बिहार के लिए थीं।












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