SC ने तलाक-ए-बाइन को गैर-कानूनी करार देने वाली PIL पर जारी किया नोटिस, सुनवाई कल
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बाइन और तलाक-ए-किनाया को असंवैधानिक घोषित करने वाली याचिका को एक्सेप्ट कर ली है। कोर्ट की तरफ से मामले में नोटिस जारी कर दिया गया है। इसके मुताबिक मामले में सुनवाई कल यानि कि मंगलवार को होगी। तलाक-ए-किनाया और तलाक-ए-बाइन की वैधता व एकतरफा अतिरिक्त-न्यायिक तलाक के सभी रूपों को लेकर याचिका डॉक्टर सैयदा अमरीन की तरफ से दायर की गई है। याचिका के जरिए केंद्र से सभी नागरिकों के लिए तटस्थ, धर्म, तलाक के समान और तलाक की एक समान प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की गई है।
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याचिका में कहा गया है कि यह कई देशों में प्रतिबंधित हैं। साथ ही याचिका के जरिए मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1929 की वैधता को भी चुनौती दी गई है। याचिका के जरिए कहा गया है कि तलाक-ए-किनाया और तलाक-ए-बाइन व एकतरफा अतिरिक्त-न्यायिक तलाक से मुस्लिमों महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा याचिका के जरिए इसे अनुच्छेद 12, 15, 21, 25 का भी उल्लंघन बताया गया है।
जानें क्या होता है तलाक-ए-किनाया और तलाक-ए-बाइन का अर्थ?
तलाक-ए-किनाया और तलाक-ए-बाइन का अर्थ होता है कि मैं तुम्हे आजाद करता हूं, अब तुम आजाद हो/यह रिश्ता हराम है, तुम मुझसे अलग हो आदि। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया है कि शादी के बाद उसके माता-पिता को दहेज के लिए तंग किया जाता था। वहीं, जब पिता ने दहेज देने से माना कर दिया तो उसे तलाक-ए-किनाया और तलाक-ए-बाइन दे दिया। ऐसे में इस कानून को असंवैधानित घोषित किया जाए। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है यह कानून मौखिक है। इसके जरिए आए दिन मुस्लिम महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
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