SC ने सेंट्रल विस्टा परियोजना पर रोक लगाने से किया इनकार, जानें क्यों अहम है ये प्रोजेक्ट
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को दूसरी याचिका की नकल नहीं करने की नसीहत दी है, हालांकि अभी इसको लेकर एक अन्य याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जिस पर आगे सुनवाई होगी। सेंट्रल विस्टा योजना केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके तहत कई इमारतों का निर्माण किया जाएगा। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस योजना को फिजूलखर्ची बताया था।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई थी। जिसमें कहा गया था कि लुटियन क्षेत्र में 86 एकड़ जमीन को इस योजना के तहत लिया जाएगा। ऐसे में लोग खुली और हरी भरी जगह से वंचित हो जाएंगे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के चीज जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की।
इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि नए संसद भवन और अन्य कार्यालयों के निर्माण के लिए ये योजना शुरू की गई है। ऐसे में किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि कोरोना से उपजे हालात में कोई कुछ भी नहीं करने जा रहा है और कोई जल्दबाजी नहीं है। परियोजना के खिलाफ इसी तरह की एक याचिका लंबित है। ऐसे में उसकी नकल करने की जरूरत नहीं है।
इस वजह से शुरू हुई परियोजना
दरअसल अंग्रेजों ने भारतीय संसद भवन का निर्माण कराया था, जिसका उद्घाटन 1927 में हुआ था। ये इमरात कुछ सालों बाद 100 साल की हो जाएगी। साथ ही वर्तमान जरूरत के हिसाब से कई सुविधाएं इसमें नहीं हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। जिसके तहत संसद और नए कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा। जो 250 साल तक चलेंगी। वहीं इस परियोजना के तहत केंद्रीय सचिवालय, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट समेत तीन किलोमीटर के इलाके को नया लुक दिया जाएगा।












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