रद्द हो चुकी धारा के तहत केस दर्ज को लेकर SC नाराज, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया नोटिस
नई दिल्ली, अगस्त 02। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक नोटिस जारी किया। इस नोटिस में सर्वोच्च न्यायल ने जवाब मांगा है कि जब IT एक्ट की धारा 66 ए को रद्द कर दिया गया था तो कई राज्यों में इस धारा के तहत मामले क्यों दर्ज किए गए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी नोटिस जारी किया है। सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में ही इस धारा को खत्म कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी इस धारा के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए थे।
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एक एनजीओ की याचिका पर कोर्ट कर रहा है सुनवाई
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एक एनजीओ द पीपुल यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में केंद्र को सभी पुलिस स्टेशनों को धारा 66 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के खिलाफ सलाह देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस बी आर गवई की बेंच ने कहा कि चूंकि पुलिस राज्य का विषय है, इसलिए यह बेहतर होगा कि सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित क्षेत्रों को पक्षकार बनाया जाए तथा "हम एक समग्र आदेश जारी कर सकते हैं जिससे यह मामला हमेशा के लिए सुलझ जाए।"
IT एक्ट की 66ए के तहत हुए ते 1000 केस
आपको बता दें कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने बताया था कि IT एक्ट की धारा 66ए के तहत 2015 के बाद से 1000 नए मामले दर्ज हुए हैं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी भी जताई थी। जस्टिस नरीमन, जस्टिस गवई और जस्टिस केएम जोसेफ की तीन सदस्यों वाली बेंच ने कहा था कि ये वाकई बहुत हैरान करने वाला मामला है, इस मामले में हम नोटिस जारी करेंगे। बेंच ने कहा था कि जो हो रहा है वो भयानक है।
पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था राज्यों के विषय हैं- केंद्र
सोमवार को हुई सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि IT एक्ट की धारा-66 ए प्रावधान को रद्द करने के बाद इसके तहत दर्ज हुए मामलों को बंद कराना राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है। राज्य सरकारों के तहत कानून का पालन करने वाली एजेंसियों को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि आईटी एक्ट की धारा-66ए के तहत कोई नया मामला दर्ज न हो। हलफनामे में कहा गया था कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था भारत के संविधान के अनुसार राज्य के विषय हैं।












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