चुनाव से पहले मुफ्त के वादे: SC ने दो बड़े राज्यों को भेजा नोटिस, केंद्र और चुनाव आयोग से भी मांगा जवाब
चुनाव से पहले मुफ्त के वादे करने के खिलाफ दी गई याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अब दो बड़े राज्य मध्य प्रदेश और राजस्थान को नोटिस भेजा है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को भी नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि चुनावी लाभ की योजनाओं से लोगों पर बोझ पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और चुनाव पैनल से चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि चुनाव से "छह महीने पहले" टैबलेट जैसी मुफ्त चीजें वितरित की जा रही थीं और राज्य सरकारें इसे सार्वजनिक हित बता रही थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य भारी कर्ज में हैं और मुफ्त चीजें नहीं बांटी जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि चुनाव से पहले सरकार द्वारा नकदी बांटने से ज्यादा क्रूर कुछ नहीं हो सकता। यह हर बार हो रहा है और इसका बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ता है।
गौरतलब है कि जनवरी 2022 में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने चुनाव में राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त की घोषनाओं के खिलाफ एक जनहित याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अपनी याचिका में उपाध्याय ने चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों द्वारा फ्रीबीज या मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगाने की अपील की। इसमें मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसी पार्टियां की मान्यता रद्द करनी चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार ने अश्विनी से सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से फ्रीबीज की परिभाषा तय करने की अपील की। केंद्र ने कहा कि अगर फ्रीबीज का बंटना जारी रहा तो ये देश को 'भविष्य की आर्थिक आपदा' की ओर ले जाएगा।












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