दिल्ली में ऑक्सीजन संकट: SC ने केंद्र को लगाई फटकार, 'अधिकारी को जेल भेजें या अवमानना का केस करें?'
नई दिल्ली, 05 मई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, बुधवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऑक्सीजन की मांग दिल्ली में अधिक है, उसके मुताबिक हमें संसाधन की जरूरत पड़ेगी। केंद्र की इस टिप्पणी पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कड़े शब्दों में पूछा कि आपने दिल्ली को कितना ऑक्सीजन दिया है, साथ ही यह भी पूछा कि आपने हाई कोर्ट में यह कैसे कहा कि उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली को 700 एमटी ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का आदेश नहीं दिया है?
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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऑक्सीजन की समस्या को दूर करने के लिए क्या किया जाए। यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि कोर्ट के आदेश का पालन हो, नाकाम अधिकारियों को जेल में डाला जाए या फिर खुद केंद्र सरकार अवमानना के केस के लिए तैयार रहें। हालांकि इन सब से दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी इसलिए बेहतर है कि काम किया जाए। न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना वायरस मरीजों की मृत्यु ऑक्सीजन गैस की कमी के चलते हो रही है और यह एक राष्ट्रीय आपातकाल है। केंद्र अपनी ओर से कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी शॉर्टेज है ऐसे में अपना प्लान हमें बताइए।
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ऑक्सीजन संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई का उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबई में बीएमसी ने कोरोना काल में बढ़िया काम किया है ऐसे में दिल्ली को कुछ सीखना चाहिए। दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से इसके वितरण की व्यवस्था की जानी चाहिए। राजधानी में कोरोना वायरस का बहुत बुरा प्रकोप जारी है। कोर्ट ने कहा कि हमने बफर स्टॉक बनाने का संकेत दिया था। अधिक जनसंख्या वाले शहर मुंबई में किया जा सकता है तो निश्चित रूप से यह दिल्ली में भी किया जा सकता है। हमें सोमवार तक बताइए कि दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन कब और कैसे मिलेगा।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आज अपनी सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें अवमानना का केस चलाए जाने की बात कही गई थी। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने केंद्र के अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का आदेश दिया था, पीठ ने कहा था कि अगर वह इसमें असफल रहे तो उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जाएगी।












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