फरिश्ते : 5 दोस्तों ने 3 लग्जरी कारों को बनाया अस्पताल, मरीजों को सड़क पर ही फ्री में दे रहे ऑक्सीजन, VIDEO
कोटा, 5 मई। इस वक्त पूरा देश कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहा है। रोजाना हजारों लोग कोविड-19 की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को न पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही और ना ही समय पर बेड नसीब हो रहे। चारों तरफ सांसों पर संकट है। हाहाकार मचा हुआ है। इस संकट में एक तरफ सरकार अपने स्तर पर भरकस प्रयास कर रही है। वहीं, दूसरी ओर कुछ भी फरिश्ते बनकर सामने आ रहे हैं।
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कोटा के पांच दोस्तों की कहानी
ऐसी ही कहानी राजस्थान की शिक्षानगरी कोटा के पांच दोस्तों की है, जो कोरोना से जूझ रहे मरीजों के लिए फरिश्ते बने हुए हैं। सभी दोस्तों ने तीन लग्जरी कार व एक वैन को इंमरजेंसी अस्पताल में बदल दिया और मरीजों को ऑक्सीजन, दवा और इंजेक्शन मुहैया करवा रहे हैं।

चंद्रेश गोहिजा का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी के साथ बातचीत में कोटा के विज्ञान नगर निवासी चंद्रेश गोहिजा बताते हैं कि उनका आर्य समाज रोड पर गाड़ियों का सर्विस सेंटर है। कोरोना का कहर बढ़ा तो उन्होंने अपने चार दोस्त रवि कुमार, आशु कुमार, भरत समनानी और आशीष सिंह के साथ मिलकर तीन कारों को इमरजेंसी अस्पताल में बदल दिया। आज चौथे वाहन के रूप में एक वैन को भी शामिल किया है।

साईं चौक पर खड़ी रहती हैं गाड़ियां
चंद्रेश ने बताया कि ये सभी एसी युक्त कारें कोटा के साईं चौक पर खड़ी रहती है और उनसे सम्पर्क करने वाले मरीजों को वे यहीं पर ही गाड़ियों में ही दवा व ऑक्सीजन उपलब्ध करवा रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से यह सिलसिला जारी है। अब तक करीब 25 मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।

जानिए कौन दोस्त क्या करता है?
चंद्रेश कहते हैं कि उनके दोस्त आशीष सिंह फाइनेंस कंपनी में करते हैं। भरत समनानी गायक कलाकार और रवि कुमार कंपाउंडर हैं। आशु कुमार कोटा मंडी में काम करते हैं। पांचों दोस्तों को कामकाज अलग अलग है, मगर कोरोना संकट में सबकी सोच समान है और वो है लोगों की सेवा करना।

पांच-पांच घंटे में कतार में खड़े रहकर लाते हैं सिलेंडर
कोटा में कोविड से जूझ रहे मरीजों के लिए किसी फरिश्ते की भूमिका निभा रहे इन दोस्तों ने बताया कि रोजाना अपने पास से दस हजार रुपए खर्च कर रहे हैं। ऑक्सीजन प्लांट के बाहर पांच-पांच घंटे कतार में लगकर एक-एक सिलेंडर ला रहे हैं। फिर सांई चौंक पर कार में मरीज को ऑक्सीजन मुहैया करवाते हैं। उसके शरीर में ऑक्सीजन लेवल ठीक हो जाता है तो उसे अपनी ही गाड़ी से अस्पताल में भर्ती करवाते हैं।
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नई गाड़ी में भी बनाया अस्पताल
चंद्रेश कहते हैं वे नई गाड़ी लेकर आए थे। कलर भी अपनी पसंद का था, मगर कोरोना महामारी में लोगों को मरते देख रहा नहीं गया और उस गाड़ी में अस्पताल बना दिया। लोगों को वो एम्बुलेंस जैसी दिखे इसके लिए उस पर सफेद रंग करवा लिया।
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