कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमेटी, जानिए कौन हैं इसके सदस्य,कर चुके हैं Farm Laws का समर्थन
कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमेटी, जानिए कौन हैं इसके सदस्य,कर चुके हैं Farm Laws का समर्थन
Farmers Protest Update: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों पर रोक लगाते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने चार सदस्यों की कमेटी बनाई है। ये कमेटी किसानों और सरकार के पक्ष जानेंगी और सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने जिन चार लोगों को इस कमेटी के लिए चुना है, वो हैं- भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल घनवत शेतकारी। खास बात ये है कि ये चारों लोग कृषि कानूनों के समर्थक हैं। भूपेंदर सिंह मान भारतीय किसान यूनियन से जुड़े भूपिंदर सिंह मान कृषि विशेषज्ञ होने के साथ-साथ अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के चेयरमैन हैं और पूर्व में राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। मान ने कृषि कानूनों का समर्थन किया है।
अनिल घनवत महाराष्ट्र के प्रमुख किसान संगठन शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं। शेतकारी संगठन कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार का समर्थन कर रहा है। यह किसान संगठन भी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर कृषि कानूनों पर अपना समर्थन दे चुका है।
कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाट भारत सरकार की खाद्य आपूर्ति और मूल्य निर्धारण नीतियों के लिए सलाह देने वाली सलाहकार समिति कमिशन फॉर एग्रीकल्चरल कॉस्ट्स एंड प्राइसेस के वो चैयरमेन रह चुके हैं। वहीं डॉक्टर प्रमोद कुमार जोशी कृषि शोध के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम हैं। वो हैदराबाद के नैशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट और नैशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली के अध्यक्ष रह चुके हैं। ये दोनों भी नए कानूनों के पक्षधर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों पर भी रोक लगा दी है। इन कानूनों को अब अमल में नहीं लाया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगले आदेश तक हम इन कानूनों पर रोक लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कमेटी सबकी सुनेगा। जिसे भी इस मुद्दे का समाधान चाहिए वह कमेटी के पास जा सकता है। यह कोई आदेश नहीं जारी करेगी या किसी को सजा नहीं देगी। यह केवल हमें अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। उन्होंने कहा कि हम कमेटी का गठन कर रहे हैं ताकि हमारे पास एक साफ तस्वीर हो। हम यह नहीं सुनना चाहते हैं कि किसान कमिटी के पास नहीं जाएंगे। हम समस्या का समाधान करना चाहते हैं। अगर किसान अनिश्चितकाल के लिए प्रदर्शन करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि केंद्र सरकार बीते साल तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं बीते 26 नवंबर से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। हजारों किसान सिंघु बॉर्डर पर ठंड में बैठे हैं।
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