हवाई अड्डों पर विकलांग यात्रियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारी रखें सहानुभूतिपूर्ण भाव
सुप्रीम कोर्ट ने हवाई अड्डों पर विकलांग व्यक्तियों की सहायता में सुधार करने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और पंकज मिथल की पीठ ने निर्देश दिया कि हवाई अड्डे के कर्मचारियों को PWD यात्रियों के प्रति अधिक संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए। यह निर्णय एक व्हीलचेयर पर निर्भर महिला यात्री अरुषि सिंह द्वारा दायर याचिका के बाद आया। जिन्होंने कोलकाता हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच में असुविधा का सामना किया था।
हवाई अड्डे के कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण दें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हवाई अड्डे के कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। ताकि वे PWD यात्रियों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को समझ सकें और उनकी सहायता प्रभावी ढंग से कर सकें। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड द्वारा दिए गए आदेश के अनुरूप है। जिसमें हवाई अड्डों पर अभिगम्यता मानकों को तीन महीनों के भीतर लागू करने की बात कही गई थी।

महिला सुरक्षा गार्ड और सहायक कर्मचारियों की कमी का मुद्दा
गुरुग्राम की निवासी अरुषि सिंह ने याचिका में बताया कि कोलकाता हवाई अड्डे पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के अधिकारियों ने उन्हें कई बार खड़े होने के लिए कहा। जिससे उन्हें असुविधा हुई। उनके वकील ने हवाई अड्डे पर महिला सुरक्षा गार्ड और सहायक कर्मचारियों की कमी का भी मुद्दा उठाया। जो PWD यात्रियों की मदद कर सकें।
हवाई अड्डों की सुरक्षा CISF और राज्य पुलिस के पास
भारत में हवाई अड्डों की सुरक्षा CISF और राज्य पुलिस संभालती है। कोलकाता हवाई अड्डे की यह घटना इंगित करती है कि सुरक्षा एजेंसियों को PWD यात्रियों के प्रति अधिक संवेदनशील और सहयोगात्मक होने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हवाई अड्डे सभी यात्रियों के लिए खासकर विकलांग यात्रियों के लिए अधिक सुलभ और आरामदायक बनें। इस पहल से PWD यात्रियों को एक गरिमामय और सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।












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