टीकाकरण अभियान में निजी अस्पतालों की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, पूछा ये सवाल
नई दिल्ली, 08 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सोमवार बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि देशवासियों को अब सरकारी कोविड केंद्रों में मुफ्त वैक्सीन का टीका दिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र ने मंगलवार को निजी अस्पतालों के लिए 5 फीसदी जीएसटी के साथ वैक्सीन की नई कीमत तय कर दी है। देश में जारी टीकाकरण अभियान में निजी अस्पतालों की भूमिका को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है। न्यायालय ने पूछा कि क्या प्राइवेट अस्पताल सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरत के समय भी अपने लाभ को प्राथमिकता देंगे?

गौरतलब है कि सोमवार को दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से पता चलता है कि अब वैक्सीन निर्माता कंपनियों के 25% वैक्सीन स्टॉक को निजी अस्पतालों को खरीदने के लिए तय कर दिया है। ऐसे में उच्चतम न्यायालय की यह चिंता वास्तविक और मौजूदा परिस्थिति में वाजिब भी है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई को दिए अपने एक आदेश में सरकार को निजी अस्पतालों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में आशंका जताई थी कि निजी अस्पताल अपने द्वारा खरीदे जाने वाले टीकों को तब तक ऊंचे दामों पर बेचते रहेंगे जब तक इसके लिए कोई कड़ा कदम नहीं उठाया जाता।
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न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को इस बात से भी वाकिफ कराया था कि निजी अस्पताल, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले जरूर होते हैं लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य 'लाभ' कमाना होता है। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, एल. नागेश्वर राव और एस. रवींद्र भट की बेंच ने कहा कि टीकाकरण नीति के तहत निजी अस्पतालों द्वारा वैक्सीनेशन से लाभ कमाना उनके अस्तित्व के मूल सिद्धांतों में से एक से जुड़ा है। वे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करते हैं, लेकिन हैं वो प्राइवेट और लाभ कमाने वाले। नतीजतन, वे खरीदे गए टीके की खुराक को अधिक कीमत पर बेच सकते हैं, जब तक की इस सिलसिले में कड़े नियम नहीं बनाए जाते।












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