कॉलेजियम ने की जस्टिस गवई और सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई (Justice Bhushan Ramkrishna Gavai) और हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) को पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने सिफारिश की है। 5 जजों की कॉलेजियम ने इन दो नामों की सिफारिश केंद्र सरकार से की है।

Supreme Court Collegium recommends elevation of Justice Bhushan Gavai and Justice Surya Kant as SC judges

जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को 14 नवंबर 2003 को बॉम्बे हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था और वह तब से इस पद पर कार्यरत हैं। वहीं जस्टिस सूर्य कांत को 9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा का जज नियुक्त किया गया था। उन्हें 5 अक्तूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश का चीफ जस्टिस बनाया गया था।

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वहीं, मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस अनिरुद्ध बोस और एस बोपन्ना के नामों पर केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। इन जजों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव कॉलेजियम की ओर से केंद्र सरकार को भेजा गया था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को वापस कर दिया था।

कॉलेजियम ने झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एएस बोपन्ना के नाम का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा था। जस्टिस बोस मुख्य रूप से कोलकाता कोर्ट से आते हैं, वह वरिष्ठता सूचि में 12वें स्थान पर हैं। जबकि जस्टिस बोपन्ना की मुख्य कोर्ट कर्नाटक हाई कोर्ट है, वह वरिष्ठता की सूचि में 36वें पायदान पर आते हैं।

29 हो जाएगी जजों की संख्या

12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने जस्टिस बोस और बोपन्ना के नाम को आगे बढ़ाया था और कहा गया था कि दोनों ही जजों को उनकी योग्यता और सम्मान के आधार सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। अगर दोनों ही जजों के नाम पर केंद्र सरकार अपनी मुहर लगा देता है तो सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 29 हो जाएगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 31 जज हो सकते हैं।

पहली बार नहीं हुआ ऐसा

यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम और केंद्र सरकार के बीच आम सहमति नहीं बनी है। इससे पहले भी जजों की नियुक्ति को लेकर दोनों में अलग-अलग राय देखने को मिली है। इससे पहले केंद्र सरकार ने जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति को भी ठुकरा दिया था। जनवरी 2018 में कॉलेजियम ने उनके नाम को हरी झंडी दे दी थी। सरकार का कहना था कि जस्टिस जोसेफ केरल हाई कोर्ट में वरिष्ठ नहीं हैं, उनकी पैरेंट कोर्ट में उनसे अधिक वरिष्ठ जज मौजूद हैं। लेकिन पिछले वर्ष जुलाई माह में एक बार फिर से कॉलेजियम ने उनके नाम को आगे बढ़ाया, जिसके बाद सरकार ने उनके नाम को हरी झंडी दे दी। बता दें कि अगर सुप्रीम कोर्ट के जज मुख्य न्यायाधीश बनते हैं तो उनकी वरिष्ठता काफी मायने रखती है।

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