SC में 'Money Bill' पर घिरेगी मोदी सरकार? CJI चंद्रचूड़ की रिटायरमेंट से पहले क्या चाहती है कांग्रेस?
Money Bill Controversy: CJI (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) डीवाई चंद्रचूड़ इस साल नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस चाहती है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट राज्यसभा को कथित तौर पर दरकिनार करने के लिए लोकसभा से 'धन विधेयक' के तौर पर पारित कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करके फैसला सुना दे।
दरअसल, कांग्रेस की उम्मीद इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह संसद में राज्यसभा को कथित तौर पर नजरअंदाज करने के लिए 'धन विधेयक' के रूप में पास किए गए कानूनों पर सुनवाई करने के लिए एक संविधान पीठ का गठन करेगा।

कपिल सिब्बल के अनुरोध पर CJI ने संविधान पीठ के गठन का दिया भरोसा
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार सुबह वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने CJI चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच के सामने इन याचिकाओं का जिक्र किया था। उनकी दलील थी कि इस संबंध में दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए मामले को लिस्ट में डालने की जरूरत है।
उन्होंने सीजेआई से आग्रह किया कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लें। इसपर CJI ने कहा 'जब मैं संविधान पीठों का गठन करूंगा...मैं इसपर फैसला लूंगा।'
राज्यसभा को कथित तौर पर नजरअंदाज करने का विवाद
दरअसल, विपक्ष का आरोप रहा है कि मोदी सरकार ने अपने पिछले दो कार्यकालों में कई विधेयकों को कथित तौर पर लोकसभा से जानबूझकर धन विधेयकों (money bills) के रूप में पास करवाया। ताकि, राज्यसभा उसपर किसी तरह से अड़ंगा न लगा पाए। राज्यसभा में मोदी सरकार के पास अक्सर बहुमत की कमी रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बहुत खुश है कांग्रेस
अब सुप्रीम कोर्ट जिस तरह से इन मामलों की सनवाई के लिए अलग से संविधान पीठ गठन करने के लिए तैयार हुआ है, उससे कांग्रेस पार्टी गदगद हो गई है। पार्टी चाहती है कि CJI चंद्रचूड़ रिटायर होने से पहले इस मामले को लेकर अंतिम नतीजे तक पहुंच जाएं।
कांग्रेस महासचिव और पार्टी के कम्यूनिकेशन इंचार्ज जयराम रमेश ने इसको लेकर एक्स पर एक पोस्ट लिखकर आरोप लगाया है, 'पिछले दस वर्षों में कई विधेयकों को संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत 'धन विधेयक' घोषित करके संसद से पारित करने करने के लिए बाध्य किया गया है। 2016 का आधार अधिनियम इसका अच्छा उदाहरण है।'
कांग्रेस चाहती है कि CJI चंद्रचूड़ के रिटायर होने से पहले हो जाए फैसला
उन्होंने आगे लिखा है, 'मैंने इसे धन विधेयक घोषित करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और तब अपने असहमतिपूर्ण फैसले में वर्तमान प्रधान न्यायाधीश ने इस घोषणा को 'संविधान के साथ धोखाधड़ी' कहा था। मैंने अन्य मामलों में भी चुनौती दी थी। 2014 से आर्टिकल 110 के घोर दुरुपयोग पर याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक अलग संवैधानिक पीठ गठित करने का आज (15 जुलाई, 2024) का प्रधान न्यायाधीश का फैसला एक स्वागत योग्य कदम है। उम्मीद है कि नवंबर 2024 में उनके रिटायर होने से पहले अंतिम और निर्णायक फैसला हो जाएगा।'

सुप्रीम कोर्ट ने वैद्यता पर विचार करने की बात कही थी
पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह आधार अधिनियम जैसे कानूनों को 'धन विधेयक' के तौर पर पारित करने की वैद्यता के मामले में विचार करने के लिए सात सदस्यीय एक एक बेंच गठित करेगा। इस तरह का विवाद प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट जैसे कानूनों को लेकर भी हो चुका है।
धन विधेयक क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की व्याख्या की गई है। कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसपर अंतिम फैसला लेने का अधिकार संविधान ने लोकसभा के स्पीकर को दिया है।
धन विधेयक लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है और राज्यसभा न तो इसमें संशोधन कर सकती है और न ही उसे इसे खारिज करने का अधिकार है। राज्यसभा धन विधेयक के मामले में लोकसभा को सिर्फ सिफारिशें कर सकती है, जिसे मानना या नहीं मानना निचली सदन का अधिकार है।
धन विधेयक के मामले में लोकसभा को क्यों मिली है प्राथमिकता?
संविधान निर्माताओं ने यह व्यवस्था इस सोच के साथ की है, ताकि जनता के द्वारा सीधे चुने गए सदन को ही धन से संबंधित मामले पर फैसला लेने का अंतिम अधिकार हो, जो कि सीधे जनता के प्रति जिम्मेदार है। राज्यसभा के सदस्य जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं करते। जबकि, लोकसभा के सदस्यों को जनता के बीच में जाकर जवाब देना पड़ता है।












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