गोपीनाथ मुंडे की वजह से ही हुआ था बीजेपी-शिवसेना गठबंधन

पिछले 47 वर्षों से राजनीति में सक्रिय थे और 37 वर्ष की उम्र से वह हर चुनाव में अपनी जीत पक्की करते आ रहे थे।
मुंडे की आकस्मिक मौत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक बड़ी क्षति है क्योंकि मुंडे महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा कद रखते थे जिसकी वजह से पार्टी महाराष्ट्र के अंदर अपनी पकड़ को मजबूत कर सकी थी।
इसके अलावा मुंडे की अगुवाई में ही बीजेपी अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लड़ने की तैयारी कर रही थी। इस बात की भी संभावना था कि मुंडे महाराष्ट्र के अगले सीएम भी बन सकते थे।
65 साल के गोपीनाथ शिक्षा खत्म करने के बाद ही संघ से जुड़ गए थे। बाद में यहीं से उनका सियासी जीवन भी शुरू हुआ। किसान परिवार से आने वाले मुंडे जल्दी ही जमीनी नेता के तौर पर पहचाने जाने लगे। 37 साल की उम्र से ही वो जनप्रतिनिधि चुने जा रहे थे।
1980 से 2009 के बीच पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे। 1995 में वो महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री बने। 2014 में बीड से लोकसभा के लिए चुने गए। वे महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री भी रहे। वे बेहद सरल और मृदुभाषी थे।
उनके अचानक से संसार से चले जाने से उनके मित्रों,परिजनों और प्रशंसक स्तब्ध हैं। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर तो उनका स्मरण करते हुए रो पड़े।
गोपीनाथ मुंडे ही वह शख्स थे जिनकी वजह से बीजेपी और शिवसेना के बीच गठबंधन कायम हो सका था। शिवसेना के दिवंगत सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे के साथ मुंडे के काफी करीबी रिश्ते थे।
सन 1970 में शिवसेना ने हिंदुत्व के एजेंडे पर काम करना शुरू किया था। उस समय मुंडे प्रमोद महाजन के साथ कॉलेज स्तर की राजनीति में सक्रिय थे।
शिवसेना ने वर्ष 1995 में बीजेपी के साथ गठबंधन करके विधानसभा का चुनाव लड़ा था और पार्टी को एक बड़ी जीत हासिल हुई। वर्ष 1999 से बीजेपी शिवसेना गठबंधन ने एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई थी।
गोपीनाथ मुंडे बीजेपी और शिवसेना के बीच एक अहम कड़ी की तरह थे। दोनों पार्टियों का गठबंधन इस समय बीएमसी में सत्ताधारी पार्टियां हैं। निश्चित तौर पर मुंडे के साथ ही बीजेपी ने मराठवाड़ा से आने वाला अपना एक बड़ा नेता खो दिया है।












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