सुभाष चंद्र बोस आईएनए ट्र्स्ट ने किया नेता जी को याद, युवाओं को बताया उनका व्यक्तित्व
नई दिल्ली, 16 अगस्त: देश इस साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 जयंती मना रहा है। 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में घोषित किया गया है, जब देश अंग्रेजों का गुलाम था, तब नेताजी ने आजाद हिंद फौज बनाकर देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद करने के लिए बिगुल फूंका था। देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस को स्वतंत्रता दिवस से पहले (13 अगस्त ) आईएनए ट्रस्ट ने एक कार्यक्रम के जरिए उन्हें याद किया। इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं में देशभक्ति की भावना को और भी मजबूत करना और नेताजी के बारे में युवाओं को बताना था।

आईएनए ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नेता जी के व्यक्तित्व पर खुलकर चर्चा की गई। इस दौरान ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन डॉ. जेएस राजपूत ने बताया कि हमारा असली मकसद देश को उसके सही इतिहास के बारे में बताना हैं। वाइस चेयरमैन के मुताबिक नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता दिलाने के लिए क्या काम किया, इसके बारे में अभी देश ने जाना ही कहां है?
वाइस चेयरमैन ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस आईएनए ट्रस्ट इस दिशा में काम कर रहा है कि देश को उसका सही इतिहास मिले। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नेताजी ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी दिलाने में जो अहम भूमिका निभाई हैं, उनके योगदान को देश ने अभी तक जाना ही नहीं हैं। उनके मुताबिक नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनको लोगों के सामने लाने का काम किया जा रहा है।
भारत के इतिहास के साथ छेड़छाड़
ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन डॉ. जेएस राजपूत के मुताबिक साल 1970 के आसपास हमारे इतिहासकारों ने एक विशेष विचारधारा के पक्ष ने लिखना शुरू किया। उन्होंने साफ कहा कि उन लोगों ने भारत के इतिहास के साथ छेड़छाड़ की, जिसके बाद कई पक्षों को छुपाया गया, जिससे आज के लोग अनजान हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम देश के उन महापुरुषों में आता है, जिन्होंने देश की आजादी की जंग में अपनी अहम भूमिका निभाई हैं। नेताजी का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। आजादी की लड़ाई में उन्होंने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा', 'दिल्ली चलो और 'जय हिन्द' जैसे नारों से स्वतंत्रता संग्राम में नई जान फूंकने का काम किया था।












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