सिर्फ अफजल ही नहीं मकबूल के बारे में भी जानिए
श्रीनगर। नौ फरवरी से देश में एक अजीब सा माहौल है और इसकी शुरुआत हुई थी राजधानी दिल्ली स्थित जेएनयू के कैंपस से। यहां पर संसद हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु की फांसी को तीन वर्ष पूरे होने पर एक उसके समर्थन में छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा था।
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अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाए गए और भारत के टुकड़े करने की बातें होने लगीं। अफजल के साथ छात्र एक और शख्स का नाम ले रहे थे और उसका नाम था मकबूल भट।
आतंकी, मकबूल को तिहाड़ जेल में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। आपको बता दें कि घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा मिलने की वजह मकबूल भट ही था।
आखिर कौन था मकबूल और क्या था आतंकवाद के साथ उसका कनेक्शन, आगे की स्लाइड्स में जानिए।

जेकेएलएफ का फाउंडर और आतंकी
मकबूल भट जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ का फाउंडर था, वही संगठन जिसका मुखिया इस समय यासीन मलिक है।

पेशावर यूनिवर्सिटी से किया मास्टर्स
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में मकबूल का जन्म 18 फरवरी 1938 को हुआ। उसने कश्मीर से इतिहास और पॉलिटिकल साइंस में गेज्रुएशन किया था। इसके बाद मकबूल पाकिस्तान के पेशावर चला गया जहां से उसने उर्दू में मास्टर्स की डिग्री हासिल कर ली।

एक टीचर और फिर जर्नलिस्ट
मकबूल ने कुछ दिनों तक एक टीचर और फिर जर्नलिस्ट के तौर पर काम किया था। 11 वर्ष की उम्र में उसकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उसके दो भाई गुलाम नबी भट और मंजूर अहमद भट सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए।

सुरंग बनाकर भागा पाकिस्तान
सन 1966 में मकबूल और जेकेएलएफ के कुछ और आतंकियों की सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ हुई। इसमें एक आतंकी मारा गया और मकबूल ने सीआईडी अफसर अमर चंद को मार दिया था।

सुरंग बनाकर भागा पाकिस्तान
उसे गिरफ्तार करके श्रीनगर की जेल में बंद कर दिया गया। लेकिन मकबूल यहां की जेल में सुरंग बनाकर पाक भाग गया।

प्लेन तक कर सकता था हाइजैक
सन 1971 मे मकबूल को लाहौर में एक पैसेंजर प्लेन हाईजैक करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। भट को पाक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। सन 1974 में उसे रिहा कर दिया गया और दो वर्ष बाद वह भारत आ गया।

भारत में हुआ गिरफ्तार
मकबूल को भारत आते ही गिरफ्तार कर लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। उसने 1984 में उस समय के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के पास दया याचिका भेजी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया।

जिस जज ने सुनाई थी सजा, उसकी करवाई हत्या
मकबूल को 1984 में फांसी दे दी गई लेकिन वर्ष 1989 में जेकेएलएफ के आतंकियों ने जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी। गंजू ने ही अमर चंद मर्डर केस में मकबूल को मौत की सजा सुनाई थी।

घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला मकबूल
मकबूल भट की मौत के पांच वर्ष बाद जेकेएलएफ ने कश्मीर को मुस्लिम अल्पसंख्यक राज्य का दर्जा दिलाने के लिए घाटी में आतंकी मुहिम की शुरुआत कर दी। इसी आतंकी गतिविधियों का नतीजा था घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन। इसके अलावा जेकेएलएफ आज तक तिहाड़ जेल में रखे उसके अवशेष उन्हें देने की मांग करती है।

आज भी घाटी में रहती है शांति
आज भी घाटी के अलगाववादी मकबूल की याद में हर वर्ष 11 फरवरी को मकबूल की याद में एक दिन का बंद रखते हैं।












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