IAS Topper थे विदेश मंत्री जयशंकर के पिता, क्या दो प्रधानमंत्रियों ने किया था अपमानित ?
जयशंकर ने बताया कि उनके पिता के. सुब्रहमण्यम साल 1979 में डिफेंस प्रोडक्शन के सचिव थे। साल 1980 में इंदिरा गांधी सत्ता में लौटी थीं। इसके बाद इंदिरा गांधी ने के. सुब्रहमण्यम को सचिव पद से हटा दिया।

K subrahmanyam Story: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने एक बेबाक इंटरव्यू के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने भारत के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर अपने आइएएस पिता को अपमानित करने का आरोप लगाया है। एस जयशंकर के पिता के. सुब्रहमण्यम 1951 के IAS TOPPER थे। उन्हें भारत की रक्षा नीति का मुख्य शिल्पकार माना जाता है। वे भारत की परमाणु नीति के सूत्रधार भी थे। उनकी विद्वता का बड़े-बड़े नेता सम्मान करते थे। 1979 में जब जनता पार्टी की सरकार थी तब के. सुब्रहमण्यम को रक्षा उत्पाद मंत्रालय का सचिव बनाया गया था। उस समय वे भारत के सबसे युवा सचिव थे। लेकिन 1980 में जब इंदिरा गांधी दोबारा सत्ता में आयी तो उन्होंने के. सुब्रहमण्यम को सचिव पद से हटा दिया था। इतना ही नहीं 1984 में जब राजीव गांधी प्रधामंत्री बने तो उन्होंने के. सुब्रहमण्यम को दरकिनार कर उनसे जूनियर अफसर को कैबिनेट सेक्रेटरी बना दिया था।

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने क्यों किया ऐसा ?
विदेश मंत्री जयशंकर का कहना है, मेरे पिता (के. सुब्रहमण्यम) बहुत ईमानदार और कर्तव्य के प्रति समर्पित अधिकारी थे। वे शोध और अध्ययन के बाद ही अपनी बात कहते थे। इस मामले में वे मंत्री और प्रधानमंत्री को भी टोक देते थे। हो सकता है कि इसी करण से उन्हें हटाया गया हो। वैसे में यह बात पूरे यकीन से नहीं कह सकता। इसके बाद वे फिर कभी सेक्रेटरी नहीं बने और भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिटायर हो गये। इसका उन्हें जीवन भर मलाल रहा। बाद में जब मेरे आइएएस भाई एस विजय कुमार ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव बने तो उन्हें बहुत खुशी हुई थी। के. सुब्रहमण्यम को चार संतान हुईं। संजय सुब्रहमण्यम इतिहाकार हैं। एस विजय कुमार आइएएस अधिकारी बने। अब रिटायर हो चुके हैं। एस जयशंकर भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी बने और अब भारत के विदेश मंत्री हैं। उनकी एक बहन हैं जिनका नाम सुधा है।

जब पद्मभूषण लेने से किया था इंकार
के. सुब्रहमण्यम कितने उसूल वाले व्यक्ति थे, यह 1999 की एक घटना से स्पष्ट होता है। 1999 में वाजपेयी सरकार ने उन्हें पद्मभूषण पुरस्कार देने की घोषणा की थी। लेकिन उन्होंने यह पुरस्कार र लेने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था, किसी पूर्व अधिकारी या पत्रकार को सरकारी सम्मान कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए। सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद वे अखबारों में नियमित रूप से कॉलम लिखते थे। 2011 में उनका निधन हो गया था। 1998 में जब अटलबिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब उन्हें नेशनल सिक्यूरिटी काउंसिल एडवाइजरी बोर्ड का संयोजक बनाया गया था। इस बोर्ड का उसी साल पहली बार गठन हुआ था। इसी बोर्ड ने भारत के परमाणु सिद्दांत की रचना की थी। तब सुब्रहमण्यम वकालत की थी कि भारत को परमाणु हथियारों की जरूरत है लेकिन वह इसका पहले प्रयोग नहीं करेगा।

वाजपेयी सरकार के फैसले का भी विरोध
ऐसा नहीं है कि के. सुब्रहमण्यम इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के विरोधी थे और अटल बिहारी वाजपेयी के समर्थक थे। उन्होंने वाजपेयी सरकार की नीति का भी विरोध किया था। वाजपेयी सरकार ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के पद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद में मर्ज कर दिया था। उन्हें सरकार के इस फैसले का विरोध किया। 2004 में जब मनमोहन सिंह की सरकार बनी तब जा कर इन दोनों पदों को फिर अलग किया गया।

जयशंकर के काम का मुरीद तो पाकिस्तान भी
एस जयशंकर का विदेश मंत्री बनना एक आश्चर्यजनक घटना थी। 2019 में किसी ने सोचा नहीं था कि हाल ही में रिटायर हुए विदेश सचिव को सीधे विदेश मंत्री बना दिया जाएगा। उस समय एस. जयशंकर न तो कोई नेता थे और न ही किसी सदन के सदस्य। यहां तक कि वे भाजपा के मेम्बर भी नहीं थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें रक्षा मंत्री बना कर सभी को चौंका दिया था। वे भी अपने पिता की तरह कर्मठ, विद्वान और अध्ययनशील व्यक्ति हैं। उनकी तारीफ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था, भारत अमेरिका के दबाव में बिल्कुल नहीं आया। उसने रूस से सस्ता तेल खरीदने का विकल्प चुना। यह हिम्मत की बात है। भारत ने दिखाया कि स्वतंत्र विदेश नीति क्या होती है। इस काम में विदेश मंत्री एस जयशंकर की भूमिका बहुत अहम रही।

बयान के बाद राजनीतिक विवाद
एस जयशंकर के बयान के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद जवाहर सरकार ने कहा है, उनके पिता ने तो गुजरात दंगे के लिए भाजपा को असुर बताया था। उन्होंने भाजपा को अधर्म का दोषी करार दिया था। फिर जयशंकर आज उसी भाजपा की सरकार में मंत्री क्यों हैं ? वे अपने पिता के बताये रास्ते पर क्यों नहीं चल रहे ? एस जयशंकर ने इस इंटरव्यू में बताया है कि वे भाजपा में क्यों शामिल हुए थे। ऐसा नहीं है कि किसी पूर्व नौकरशाह ने कांग्रेसी प्रधानमंत्री पर पहली बार कोई आरोप लगाया है। इसके पहले कांग्रेस के नेता, पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व विदेश सचिव के. नटवर सिंह ने कहा था, चीन और कश्मीर को लेकर पंडित नेहरू की नीतियां गलत थीं। उन्होंने इमरजेंसी के लिए इंदिरा गांधी की आलोचना की थी। साथ ही साथ यह भी कहा था कि राजीव गांधी में राजनीतिक प्रबंधन की काबिलियत नहीं थी। नटवर सिंह भी भारतीय विदेश सेवा के ही अधिकारी थे।
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