केंद्र का राज्यों और UT को सख्त निर्देश, नॉन-मेडिकल कामों में नहीं होना चाहिए ऑक्सीजन का उपयोग
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई के बीच अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को गंभीरता से लेते हुए रविवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को सख्त निर्देश जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करें कि कोरोना काल में तरल ऑक्सीजन का उपयोग किसी भी गैर-चिकित्सा उद्देश्य के लिए ना किया जाए, इसकी अनुमति नहीं दी गई है। अगले निर्देश तक केवल तत्काल प्रभाव से चिकित्सा प्रयोजनों के लिए तरल ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है।

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर सुनामी बनकर कहर ढा रही है। महामारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देशभर में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीज दम तोड़ रहे हैं। शनिवार को दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते 25 मरीजों ने दम तोड़ दिया। महामारी की सुनामी में लाखों लोग रोज संक्रमित हो रहे हैं जिससे मेडिकल ऑक्सीजन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
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राज्यों की गुहार और कोरोना कहर की गंभीरता को समझते हुए केंद्र सरकार ने मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई को तेज कर दिया है। इस मोर्चे पर केंद्र सरकार की मदद भारतीय रेलवे और वायुसेना कर रही है। ऑक्सीजन की कमी के मद्देनजर देश में 18 अप्रैल से ओद्योगिक क्षेत्र में गैस की सप्लाई को बंद कर दिया गया है। सीमित मात्रा में हो रहे प्राण वायु के उत्पादन के बीच ऑक्सीजन स्वास्थ्य सेवा के अलावा अन्य कामों में ना खर्च हो इसके लिए केंद्र सरकार ने सख्त फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने राज्यो और केन्द्र शासित प्रदेश सरकार को कड़े शब्दों में कहा है कि तरल ऑक्सीजन का गैर-चिकित्सा उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए इसकी अनुमति नहीं है। इसके अलावा सभी विनिर्माण इकाइयां तरल ऑक्सीजन के अपने उत्पादन को अधिकतम कर सकती हैं।












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