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Nowgam Blast: नौगाम में क्यों खतरनाक साबित हुआ 360 किलो विस्फोटक? 'फरीदाबाद मॉड्यूल' से क्या है कनेक्शन?

Nowgam Blast: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से सटे नौगाम थाना क्षेत्र में शुक्रवार, 14 नवंबर की देर रात हुए भीषण धमाके ने पूरे सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया। इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई पुलिसकर्मी और फॉरेंसिक टीम के सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए।

शुरुआती जांच में पता चला है कि यह धमाका फरीदाबाद से जब्त किए गए बड़े विस्फोटक जखीरे को हैंडल करते समय हुआ, जो हाल ही में 'व्हाइट कॉलर' आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद पुलिस की कस्टडी में था।

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लगातार कई छोटे ब्लास्ट हुए

धमाका इतना शक्तिशाली था कि नौगाम पुलिस स्टेशन की इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। देर रात हुए इस विस्फोट में तैनात पुलिसकर्मी और मौके पर मौजूद फॉरेंसिक अधिकारी सबसे अधिक प्रभावित हुए। अधिकारियों के अनुसार अब तक 7 शव मौके से निकाले गए है बाकी दो मृतकों के अवशेष बाद में बरामद हुए। घटना में घायल 24 पुलिसकर्मी और 3 नागरिकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बम निरोधक दस्ता तुरंत पहुंचा, लेकिन लगातार छोटे-छोटे द्वितीयक विस्फोटों के कारण राहत कार्य में बड़ी चुनौती आई।

फरीदाबाद लिंक: बरामद विस्फोटक सामग्री से निकला हादसे का धागा

अधिकारियों ने बताया कि धमाका उस समय हुआ जब पुलिस फरीदाबाद से जब्त किए गए भारी मात्रा में विस्फोटक को सैंपलिंग और परीक्षण के लिए खोल रही थी। यह विस्फोटक अंतरराज्यीय और ट्रांस-नेशनल 'व्हाइट कॉलर' आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के दौरान बरामद हुआ था। फरीदाबाद से 360 किलो से अधिक विस्फोटक मिली उसमें से अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट, सल्फर और अन्य रसायन मिली थी।

ये सामग्री फरीदाबाद के किराए के मकान में रहने वाले आरोपित डॉक्टर मुझम्मिल गनई के घर से मिली थी। कुछ विस्फोटक फॉरेंसिक लैब भेजे गए थे, जबकि अधिकांश नौगाम पुलिस स्टेशन में रखे गए थे। प्राथमिक केस भी इसी थाने में दर्ज था।

थ्रेट पोस्टर केस ने खोला बड़ा जाल

धमाके से कुछ हफ्ते पहले, नौगाम के बुनपोरा इलाके में पुलिसकर्मियों को धमकाने वाले पोस्टर मिले थे। इस मामले ने जांच एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क तक पहुंचाया जिसकी जड़ें शोपियां, फरीदाबाद,और दिल्ली तक फैली थीं। तीन संदिग्ध-आरिफ निसार डार उर्फ साहिल (गिरफ्तार), यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद CCTV फुटेज में पोस्टर लगाते नजर आए थे।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि पोस्टर एक पूर्व पैरामेडिक, बाद में बने इमाम मौलवी इरफान अहमद ने सप्लाई किए थे। वह मेडिकल समुदाय में अपनी पहुंच का उपयोग करके डॉक्टरों को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था। इसी कड़ी में जांच फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक पहुंची, जहां से दो डॉक्टर-मुझम्मिल गनई और शाहीन सईद-गिरफ्तार किए गए।

दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट भी फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी। कार चला रहा डॉक्टर उमर-उन-नबी भी इसी फरीदाबाद-आधारित आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था। इस केस में NIA ने जांच संभाली और जांच में पता चला कि उमर, मुझम्मिल, और शाहीन सईद तीनों अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर थे। जिसके बाद तीन और डॉक्टर-डॉ. मुश्तकीम, डॉ. मोहम्मद, और डॉ. रेहान हयात-को पूछताछ के दौरान हिरासत में लिया गया। माना जा रहा है कि ये सभी उमर-उन-नबी के नियमित संपर्क में थे।

पूरे नेटवर्क को लेकर जांच तेज

दिल्ली और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की गतिविधियों और उसके मेडिकल विभाग पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अब तक जिस तरह विस्फोटक बरामद हुए, धमाकों के बीच कनेक्शन मिले, और डॉक्टरों की बड़ी संख्या पकड़ी गई यह साफ है कि यह नेटवर्क संगठित, योजनाबद्ध और खतरनाक था।

नौगाम धमाकाः सिर्फ एक हादसा नहीं है बल्कि एक बड़े आतंकी नेटवर्क की परतें खुलने की शुरुआत है। अधिकारियों का कहना है कि यह धमाका दुर्घटना भले रहा हो, लेकिन इसके बाद जांच और भी गहरी और तेज़ होगी। क्योंकि फरीदाबाद से बरामद विस्फोटक,नौगाम में धमाका,लाल किले का ब्लास्ट,और मेडिकल पेशे से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी ये सभी घटनाएं एक ही मॉड्यूल की ओर इशारा कर रही हैं।

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