VIDEO: पीएम पद के लिए मायावती को सपोर्ट के सवाल पर यूं गच्चा दे गए अखिलेश यादव
लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक मंच पर आकर शनिवार को महागठबंधन का ऐलान कर दिया। सपा-बसपा ने 2019 लोकसभा चुनाव में बराबर 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की। बुआ-बबुआ ने कांग्रेस और आरएलडी के लिए दो-दो सीटें छोड़ी हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती-अखिलेश यादव के बीच काफी अच्छा तालमेल नजर आया। दोनों 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को रोकन के लिए प्रतिबद्ध नजर आए। पीएम नरेंद्र मोदी-अमित शाह पर हमला करते हुए मायावती ने कहा- गुरु-चेले की नींद उड़ने वाली है। यहां तक तो सब ठीक चल रहा था, लेकिन इसी दौरान अखिलेश यादव से एक पत्रकार ने ऐसा सवाल पूछ लिया कि मायावती मुस्कुराकर अपनी असहजता को छिपाने के लिए मजबूर हो गईं। मायावती उस वक्त और असहज नजर आईं, जब अखिलेश यादव ने पत्रकार के सवाल का अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया।

मायावती को प्रधानमंत्री पद के लिए सपोर्ट करने के सवाल पर अखिलेश यादव ने यूं कही मन की बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार ने अखिलेश यादव से सवाल पूछा कि क्या आप मायावती को प्रधानमंत्री के रूप में सपोर्ट करेंगे? पत्रकार ने पूरी भूमिका के साथ सपा अध्यक्ष से कुछ यूं प्रश्न किया। उन्होंने पूछा, 'मेरा आपसे एक प्रश्न है कि कल एक इंटरव्यू में आपने मायावती जी की बहुत तारीफ की थी और आज भी आपने कहा कि आपसे ज्यादा अनुभवी हैं, चार बार की मुख्यमंत्री हो चुकी हैं। क्या कोई स्थिति बनेगी कि मायावती जी को आप प्रधानमंत्री के रूप में सपोर्ट करेंगे?' सवाल सुनकर अखिलेश यादव थोड़ा गंभीर हो गए। जिस वक्त पत्रकार ने सवाल पूछना शुरू किया, तभी अखिलेश समझ गए थे कि कोई बाउंसर आने वाली है। वह बेहद गंभीरता से सुन रहे थे। जैसे ही पत्रकार ने सवाल पूरा किया सबसे पहले मायावती मुस्कुराईं और उसके बाद अखिलेश यादव ने गंभीरता को त्यागते हुए हल्के मूड में कहा, 'आपको पता है कि मैं किसको सपोर्ट करूंगा।' अखिलेश ने जैसे बात पूरी की, मायावती हंस दीं। अखिलेश यादव ने आगे कहा, 'और मैंने पहले भी कहा और आज फिर से कहता हूं कि उत्तर प्रदेश ने हमेशा प्रधानमंत्री दिया है और हमें खुशी होगी कि उत्तर प्रदेश से फिर एक प्रधानमंत्री बने।'

मायावती नहीं, पिता मुलायम सिंह यादव को पीएम बनते देखना चाहते हैं अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने यह बात गोल-मोल तरीके से कही, लेकिन समझने वाले समझ गए कि वह किसकी बात कर रहे थे। अखिलेश ने जब कहा, 'आपको पता है कि मैं किसको सपोर्ट करूंगा', तब वह किसी और की नहीं बल्कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव की बात कर रहे थे। अखिलेश यादव ने उन्नाव में दिए एक बयान में कहा था कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री का चेहरा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और सर्वमान्य नेता ही इसका मुखिया होगा। अखिलेश ने कहा था पीएम पद के लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव भी दावेदार हो सकते हैं। इसके बाद भी कई मौकों पर अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को पीएम के तौर पर देखने की इच्छा जताई थी, लेकिन मायावती के सामने इस तरह से अपनी बात कहकर अखिलेश ने जता दिया है कि बसपा से गठबंधन के बाद अखिलेश यादव पत्ते अपने हिसाब से और समय के साथ ही खोलेंगे।

जब मायावती की बात सुनकर असहज नजर आए अखिलेश यादव
यह सच है कि अखिलेश यादव की बात सुनकर भले ही मायावती मुस्कुरा दीं, लेकिन सपा अध्यक्ष की बात उन्हें असहज तो कर ही गई। सपा-बसपा महागठबंधन के ऐलान के वक्त एक और ऐसी स्थिति आई जब अखिलेश यादव थोड़ा असहज नजर आए। यह उस वक्त हुआ जब मायावती ने 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया। मायावती ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के साथ कांग्रेस पर भी जमकर प्रहार किए, लेकिन बख्शा उन्होंने सपा को भी नहीं। अखिलेश यादव की मौजूदगी में मायावती ने 1995 के गेस्ट हाउस कांड को याद किया। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि लखनऊ गेस्ट हाउस कांड से ऊपर जनहित को रखते हुए एक बार फिर दूषित और साम्प्रदायिक राजनीति को हराने के लिए सपा-बसपा ने हाथ मिलाया है। 1995 में मायावती के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से एक दिन पहले लखनऊ के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं ने मायावती पर हमला कर दिया था। यह कांड सपा-बसपा के बीच दुश्मनी की बड़ी लकीर खींच गया था, जो 25 साल बाद अब जाकर मिटी है।












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