जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन: राज्यसभा में मोदी सरकार को मिला सपा और टीएमसी का साथ,पक्ष में करेंगे वोटिंग
नई दिल्ली: मोदी सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने बढ़ाने के लिए बिल पेश किया। इसके अलावा उन्होंने उच्च सदन में जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन संशोधन बिल 2019 बिल भी पेश किया। इन बिलों को मोदी सरकार ने लोकसभा में आसानी से पास करा लिया था। लेकिन राज्यसभा में मोदी सरकार की परेशानी को काफी हद तक टीएमसी सपा और आरजेडी ने कम कर दिया है। इन दोनों ने इन बिलों पर सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है। राज्यसभा में एनडीए के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। ऐसे में उसे इन्हें पास कराने में मुश्किल आ सकती है।
'>TMC will support in Rajya Sabha the Jammu and Kashmir Reservation (Amendment) Bill, 2019 and extension of President rule in J&K pic.twitter.com/Y4eVn6hDMx
— ANI (@ANI) July 1, 2019
सपा बसपा ने किया समर्थन का ऐलान
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने बढ़ाने के लिए बिल को लेकर सपा और बसपा ने मोदी सरकार को बड़ी राहत दी है। टीएमसी ने सोमवार को कहा कि वो जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने बढ़ाने वाले बिल और जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन संशोधन बिल 2019 बिल का समर्थन करेगी। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने भी कल जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने बढ़ाने वाले बिल को समर्थन देने का ऐलान किया है। वही ं बीजेडी और आरजेडी ने भी इस बिल पर एनडीए का साथ देने का ऐलान किया है।

कांग्रेस ने किया बिल का विरोध
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने बढ़ाने वाले बिल का कांग्रेस ने विरोध किया। उन्होंने इस बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि अगर वहां पर लोकसभा चुनाव हो सकते हैं तो विधानसभा चुनाव क्यों नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर जम्मू-कश्मीर के हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया। लोकसभा में कांग्रेस ने इसका विरोध किया था। शाह ने लोकसभा में कहा था कि राज्य में विधानसभा चुनाव हाल के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ नहीं कराया गया, क्योंकि सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं था।

राज्यसभा में क्या बोले अमित शाह
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने वाला प्रस्ताव पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि 2 जुलाई को राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि 20 जून 2018 को पीडीपी सरकार के पास समर्थन ना होने की वजह से और फिर किसी भी पार्टी के सरकार बनाने के दावा पेश ना करने के बाद राज्य में 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया गया था। इसके बाद राज्यपाल ने 21 नवंबर 2018 को विधानसभा भंग कर दी। शाह ने कहा कि राज्यपाल शासन के बाद केंद्र सरकार ने 256 का इस्तेमाल कर 20 दिसंबर 2018 से राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया था। मैं आज इस शासन को और 6 महीने बढ़ाने का प्रस्ताव लेकर आया हूं। इसके अलावा शाह ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल 2019 भी उच्च सदन के पटल पर रखा, ये बिल भी लोकसभा में पारित किया जा चुका है।












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