जानिए सोनू सूद की स्‍टूडेन्‍ट लाइफ के दिलाचस्‍प किस्‍से, मां की लिखी चिट्ठियों से एक्टर का है ये खास कनेक्‍शन

मां की लिखी चिट्ठियों ने सोनू सूद को पहुंचाया इस मुकाम पर, जानें एक्‍टर की स्‍टूडेन्‍ट लाइफ के दिलचस्‍प किस्‍से

मुंबई। लॉकडाउन के मुंबई और महाराष्‍ट्र राज्‍य के कई शहरों में फंसे हजारों प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने वाले कलाकार सोनू सूद अब रियल लाइफ हीरो बन चुके हैं। सारे मजदूर सही सलामत घर पहुंच जाए इसलिए न केवल वो अपनी मेहनत की कमाई का पैसा पानी की तरह खर्च कर रहे हैं बल्कि हर दिन 18-18 घंटे काम कर रहे हैं। सोनू सूद का कहना है कि वह जब तक हर एक प्रवासी मजदूर उसके घर नहीं पहुंच देते, अपनी मुहिम को जारी रखेंगे। कहते हैं हर इंसान धन से नहीं अपने कर्मों से बड़ा आदमी बनता है। सोनू सूद ने जो प्रवासियों के दर्द को महसूस किया उसमें उनके मां-बाप की परवरिश और उनकी दी हुई सीख का भी बड़ा योगदान रहा।

 मां ने कहा था कि एक दिन बड़ा इंसान बनूंगा

मां ने कहा था कि एक दिन बड़ा इंसान बनूंगा

प्रवासी मजदूरों के मसीहा बने सोनू सूद की मां भले आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन कलाकार आज जब सब तरफ उनके नेकी की तारीफ हो रही तो वो उन्‍हें अपनी मां के वर्षों पहले कहे वो शब्द याद आ रहे हैं जब उनकी मां ने कहा था कि एक दिन बड़ा इंसान बनूंगा। सोनू सूद की मां ने ये बात तब कहीं थी जब वो नागपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद मुंबई में अभिनय की दुनिया में अपना भाग्य अजमाने आए थे। शुरुआत में जब कही मौका नहीं मिल रहा था और सोनू निराश हो रहे थे तब उनकी मां ने ये शब्द कहें थे। आइए जानते हैं सोनू के बचपन से लेकर कालेज और उनके करियर के स्‍ट्रगलिंग टाइम और मां से जुड़ी उनकी कुछ दिलचस्‍प यादें जिसे सोनू सूद ने मीडिया में साक्षा किया।

सोनू सूद को स्‍कूल में इस बात का डर सताता था

सोनू सूद को स्‍कूल में इस बात का डर सताता था

सोनू पंजाब के मूल निवासी हैं उनका जन्‍म 30 जुलाई 1973 को मोगा, पंजाब में हुआ था। अभिनय और बतौर निर्माता दुनिया में अपना लोहा मनवा चुके सोनू सूद ने यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की इसके बाद फिल्‍मों में अपना कर‍ियर बनाने मुंबई पहुंचे थे। सोनू सूद अपनी मां के बेहद करीब थे। सोनू सूद ने बताया था कि उनकी मां कॉलेज में प्रोफेसर थीं और मेरे स्‍कूल में मुझे पढ़ाने वाली अधिकांश टीचर मेरी मां की स्‍टूडेन्‍ट रह चुकी थी। इसलिए मैं स्‍कूल में कोई शरारत करता तो मुझे डर रहता कि मेरी टीचर मेरी मां से शिकायत कर देंगी लेकिन मेरी टीचर ऐसा नहीं करती थी।

कालेज में इसलिए नहीं कर पाए कोई शरारत

कालेज में इसलिए नहीं कर पाए कोई शरारत

इसके सोनू का एडमीशन उसी कालेज में जिस कालेज में उनकी मां इग्लिश की प्रोफेसर थी। जिस कारण सोनू सूद को कालेज में भी बहुत सराफत से रहना पड़ता था। उन्‍होंने कहा कि यही कारण था कि उन्‍हें कभी कालेज में शरारत का एक भी मौका नहीं मिला। . इसके बाद ही वो नागपुर चले गए और वहां से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

जब एक्टर बनने की इच्‍छा जाहिर की तो मां ने कहीं थे ये बात

जब एक्टर बनने की इच्‍छा जाहिर की तो मां ने कहीं थे ये बात

इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ाई करते समय ही सोनू ने मॉडलिंग शुरू कर दी थी। सोनू जब पंजाब से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने नागपुर के लिए निकले थे तो उनकी मां ने कहा था 4 साल का कोर्स है. हम इंतजार करेंगे कि ये 4 साल जल्दी ही बीत जाएं क्योंकि पहली पहली बार था जब वो घर से दूर गया थे। इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद जब सोनू ने रवालों को बताया कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं और मुंबई जाना चाहता हूं तो परिवार ने पूरा सपोर्ट किया और मां ने कहा अब घर एक्‍टर बन कर ही वापस लौटना।

मां की चिट्ठियों से था खास कनेक्शन

मां की चिट्ठियों से था खास कनेक्शन

सोनू सूद ने बताया था कि 'जब मैं मुंबई आया तो कोई मुझे नहीं जानता था मेरा कोई फिल्‍मी बैगग्राउंड नहीं था इसलिए मिलना इतना आसान नहीं था। लोग जब मुझे मौका देने से इंकार कर देते तो मेरा आत्मविश्वास डगमगा जाता था, लेकिन उस दौरान मेरी मां मुझे चिट्ठियां लिखा करती थी। वह उनमें कविताएं लिखा करती थीं, जिसे पढ़कर मैं मोटिवेट होता था। सोनू ने बताया कि मैं मां से अक्सर ये कहता था कि हम दिन में फोन पर तो कई बात करते हैं, इन दिनों चिट्ठियों का फैशन नहीं है। आप चिट्ठियां क्यों लिखती हैं? तब मां मुझसे कहती थी, जब मैं नहीं रहूंगी, तब तुम्हें ये चिट्ठियां मेरी याद दिलाएंगी, जब भी तुम डिमोटिवेट महसूस करोगे, ये चिट्ठियां तुम्हें मोटिवेट करेंगी। सोनू बताते हैं मां की भेजी वो सभी चिट्ठियां मैंने अमानत की तरह संभाल कर रखी हुई हैं और जब भी परेशान होता हूं तो उसे निकाल कर पढ़ता हूं और वाकई मां की लिखी चिट्टियां आज भी मुझे प्रेरणा देती हैं। मालूम हो कि सोनू सूद ने मुंबई में अपने करियर के शुरुआती दौर में बहुत संघर्ष किया हैं यही कारण है कि उन्‍होंने लोगों की पीड़ा को समझा। मुंबई में जब सोनू सूद कलाकार बनने आए तो लोकल ट्रेन का पास बनवाकर सफर किया करते थे।

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