लद्दाख भवन में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक, कहा- केंद्र ने नहीं मिला कोई आश्वासन
दिल्ली में केंद्र के साथ वार्ता के लिए पैदल यात्रा कर पहुंचे लद्दाख एक एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को विरोध की अनुमति नहीं मिली। जिसके बाद उनका काफिला लद्दाख लौट चुका है और अब वे लद्दाख भवन में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार से अब तक उनकी मांग पूरी करने को लेकर कोई आश्वासन नहीं मिला है।
एक सवाल के जवाब में वांगचुक ने कहा, "गृह मंत्रालय ने हमें आश्वासन दिया था कि नेताओं के साथ एक बैठक की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। हम लेह से पैदल आए हैं और अपने नेताओं से कुछ आश्वासन की उम्मीद कर रहे हैं।"

वांगचुक ने भी अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं और प्रमुख शहरों में लोगों की जीवनशैली के कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने बताया कि हिमालय में बिजली संयंत्र स्थापित करने की योजना से क्षेत्र के चरवाहों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
वांगचुक का विरोध क्यों?
लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह स्थानीय आबादी को अपनी भूमि और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने के लिए सशक्त बनाएगा। वांगचुक इस मांग को लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ उठा रहे हैं।












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