Aditya L-1 ने खींची सूरज की फुल डिस्क तस्वीरें, Photos में देखिए कितना अद्भुत लगता है SUN
ISRO Aditya-L1 Mission: भारत के पहले सन मिशन आदित्य L1 ने कमाल करते हुए सूरज की अद्भुत छवियां कैप्चर की है, जिनको शुक्रवार को इसरो ने साझा किया है। सूरज की इन तस्वीरों को आदित्य L1 में लगे पेलोड सूट सोलर अल्ट्रॉवायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप ने फुल डिस्क तस्वीरें खींची हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान पर लगे सौर पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (SUIT) ने पराबैंगनी तरंग दैर्ध्य (ultraviolet wavelengths) के पास से सूर्य की शानदार फोटो को कैद किया है।

इसरो ने शुक्रवार को SUIT से सूर्य की पहली पूर्ण डिस्क तस्वीरों को साझा करते हुए बताया कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि सौर अवलोकन और अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
सामने आई सूरज की फुल डिस्क इमेज
इसरो ने बताया कि ये तस्वीरें 200 से 400 नैनोमीटर तक की तरंग दैर्ध्य रेंज को कवर करती हैं। सूट पेलोड ने सूर्य के फोटोस्फीयर और क्रोमोस्फीयर के बारे में अभूतपूर्व जानकारी प्रदान करती हैं। बता दें कि सूर्य की दृश्यमान 'सतह' फोटोस्फेयर कहलाती है, जबकि इसके ठीक ऊपर की पारदर्शी परत को क्रोमोस्फेयर कहा जाता है।
सूरज की मिलेगी अहम जानकारी
ये परतें विभिन्न सौर घटनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें सनस्पॉट, फ्लेयर्स और प्रमुखताएं शामिल हैं, जो अंतरिक्ष के मौसम और पृथ्वी की जलवायु पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
SUIT को 20 नवंबर, 2023 को संचालित किया गया था, और एक सफल प्री-कमीशनिंग फेज के बाद इसने 6 दिसंबर, 2023 को अपनी पहली प्रकाश विज्ञान छवियां (First Light Science Images) लीं।
Aditya-L1 Mission:
— ISRO (@isro) December 8, 2023
The SUIT payload captures full-disk images of the Sun in near ultraviolet wavelengths
The images include the first-ever full-disk representations of the Sun in wavelengths ranging from 200 to 400 nm.
They provide pioneering insights into the intricate details… pic.twitter.com/YBAYJ3YkUy
आपको बता दें कि सन मिशन के एल1 बिंदु में प्रवेश करने की प्रक्रिया 7 जनवरी, 2024 तक पूरी होने की उम्मीद है। आदित्य एल1 को 2 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।
जिसके 125 दिनों में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी की यात्रा करने के बाद सूर्य के सबसे निकट माने जाने वाले प्वाइंट लैग्रेंजियन बिंदु L1 के आसपास एक हेलो कक्षा में स्थापित किए जाने की उम्मीद है।












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