SIR UP: तीन पीढ़ियाँ बीत गईं, फिर भी नागरिकता नहीं? यूपी में पहचान के लिए तरसते बंगाली शरणार्थीयों के सवाल
SIR UP Update: उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया चल रही है जो 26 दिसंबर तक जारी रहेगी। इसके बाद 31 दिसंबर को पहली ड्रॉफ्ट लिस्ट जारी की जाएगी ॉ और फरवरी में अंतिम मतदाता सूची भी जारी कर दी जाएगी, लेकिन राज्य में अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जो अपनी नागरिकता के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
Oneindia उत्तर प्रदेश की तराई बेल्ट से लेकर उत्तराखंड के उन सीमावर्ती जिलों तक पहुंचा जिसकी कहानी कई सवाल खड़े करती है, जो दशकों बाद भी अपने अंत का इंतजार कर रही है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, ऊधमसिंह नगर, सितारगंज, शक्तिफार्म और दिनेशपुर जैसे इलाकों में बसे हजारों बंगाली हिंदू शरणार्थी आज भी भारतीय नागरिकता के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आज़ादी के बाद भारत आए इन परिवारों की तीसरी पीढ़ी भी सरकारी फाइलों और नियम-कानून के जाल में उलझी हुई है।
विभाजन के बाद बिगड़े हालात, भारत की ओर पलायन
1957-58 और फिर 1961-62 के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बंगाली हिंदुओं के खिलाफ हालात तेजी से बिगड़े। सांप्रदायिक हिंसा, असुरक्षा और जान-माल के खतरे ने हजारों परिवारों को अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर कर दिया। मजबूरी में ये लोग भारत की सीमा पार कर आए, जहां उन्हें शरण तो मिली, लेकिन स्थायी समाधान नहीं।
उस दौर में भारत सरकार ने इन शरणार्थियों को पहले कोलकाता के डिटेंशन कैंपों में रखा। महीनों और कई मामलों में सालों तक कैंपों में रहने के बाद सरकार ने इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाने की नीति अपनाई। इसके तहत पीलीभीत, ऊधमसिंह नगर, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में इन परिवारों को बसाया गया।
तराई में नई जिंदगी, लेकिन पहचान अधूरी
स्थानीय गांव के सरपंच कहते हैं कि, पीलीभीत और आसपास की तराई बेल्ट में बसाए गए बंगाली हिंदू शरणार्थियों ने दलदली और जंगलों से घिरे इलाकों में मेहनत कर अपनी दुनिया खड़ी की। खेती की, बस्तियां बसाईं और स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने। समय के साथ हम लोग यहीं के होकर रह गए, लेकिन कानूनी रूप से "नागरिक" कहलाने का सपना अधूरा ही रहा।
वो कहते हैं कि हमारे पास आज भी सीमा पार करने की रसीदें, डिटेंशन कैंप से जुड़े कागजात, पुनर्वास से संबंधित दस्तावेज़ और पुराने सरकारी पत्र मौजूद हैं। इसके बावजूद नागरिकता का मामला हर पीढ़ी के साथ और जटिल होता चला गया।
तीसरी पीढ़ी भी दफ्तरों के चक्कर में
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन बच्चों ने भारत में जन्म लिया, पढ़ाई यहीं की और जिनकी आज की पीढ़ी ने कभी बांग्लादेश देखा तक नहीं, वे भी नागरिकता को लेकर अनिश्चितता में जी रहे हैं। कई परिवारों को आंशिक रूप से नागरिकता या पहचान पत्र मिले हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी "लंबित" की श्रेणी में हैं।
पीलीभीत के निओरिया इलाके में रहने वाले शरणार्थी परिवार बताते हैं कि वर्षों से तहसील, जिला मुख्यालय और राज्य स्तर के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार नए कागज़ मांगे जाते हैं, पुराने दस्तावेज़ों को अपर्याप्त बता दिया जाता है और मामला आगे नहीं बढ़ता।
पहचान के बिना जीवन की चुनौतियां
नागरिकता न होने का असर इन परिवारों के जीवन के हर पहलू पर पड़ता है। सरकारी योजनाओं का लाभ, स्थायी नौकरी, उच्च शिक्षा और संपत्ति से जुड़े अधिकार सब कुछ सीमित हो जाता है। कई युवा बताते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन तक नहीं कर पाते, क्योंकि उनके पास आवश्यक नागरिक दस्तावेज़ नहीं हैं।
स्थानीय स्तर पर ये लोग खुद को भारतीय ही मानते हैं और समाज में भी उनकी पहचान एक आम नागरिक जैसी है, लेकिन कानूनी दर्जा न होने से उनका भविष्य हमेशा अनिश्चित बना रहता है।
तराई क्षेत्र की साझा कहानी
यह सिर्फ पीलीभीत या निओरिया की कहानी नहीं है। तराई क्षेत्र के हजारों बंगाली हिंदू शरणार्थी परिवार इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर, सितारगंज, शक्तिफार्म और दिनेशपुर से लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैली यह समस्या आज भी समाधान का इंतजार कर रही है। Oneinda Hindi की इस ग्राउंड रिपोर्ट में उठी आवाज़ें उस पीढ़ी की हैं, जो आज भी एक ही सवाल पूछ रही है-कब मिलेगी उन्हें वह पहचान, जिसके लिए उनके बुजुर्ग दशकों पहले भारत आए थे?
-
Uttar Pradesh Gold Price: ईद पर Lucknow-Agra समेत 8 शहरों में 24K-22K गोल्ड रेट क्या? कहां महंगा-कहां सस्ता? -
Aaj Ka Chandi ka Bhav: अमेरिका-ईरान जंग के बीच चांदी धड़ाम! ₹38,000 सस्ती, आपके शहर का लेटेस्ट Silver Rate -
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट -
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान -
प्यार में ये कैसा पागलपन? महेश भट्ट के लिए सड़क पर बिना कपड़ों के दौड़ीं ये फेमस एक्ट्रेस, फिर हुआ दर्दनाक अंत -
Sone ka Bhav: जंग के बीच सोने में बड़ी गिरावट! 7000 रुपये सस्ता, क्यों गिर रहा है भाव? आज का लेटेस्ट Gold Rate -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में कब साफ होगा मौसम? दो दिन बाद फिर लौटेगी बारिश, IMD के अलर्ट ने बढ़ाई टेंशन -
Hyderabad Gold Silver Rate Today: ईद के मौके पर सोना-चांदी ने किया हैरान, जानें कहां पहुंचा भाव? -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Petrol Price Hike: ईरान जंग का पहला झटका! पावर पेट्रोल हुआ महंगा, इतना बढ़ा दाम, चेक करें लेटेस्ट रेट -
Weather UP: लखनऊ में 60KM की स्पीड से चलेंगी हवाएं! इन 26 जिलों में बारिश के साथ ओले गिरने का अलर्ट












Click it and Unblock the Notifications