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कर्नाटक में भी वायनाड जैसी त्रासदी के संकेत! 2040 तक डूब सकते हैं 2 शहर, रिपोर्ट में बड़ा दावा

वायनाड में लैंडस्लाइड (Wayavad Landslide) की त्रासदी ने भारत ही नहीं दुनिया की हिलाकर रख दिया। इससे पहले उत्तराखंड में पहाड़ों पर बसे शहर जोशीमठ के भी धंसने की खबरें थीं। हाल में हुई त्रासदी के बाद अब भारत में पहाड़ों और समुद्री तट पर बसे अन्य शहरों की स्थिरता को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। एक ताजा अध्ययन में अब कर्नाटक के दो शहरों को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है।

लैंडस्लाइड को लेकर ताजा अध्ययन रिसर्च सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी, बेंगलुरु द्वारा किया गया है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि साल 2040 तक मैंगलोर और उडुपी की करीब 5 फीसदी जमीन जलमग्न हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र में बढ़ रहा जल स्तर पश्चिमी तटीय शहरों के खतरा बन रहा है। कई तटीय इलाके जलमग्न हो सकते हैं।

Wayanad like tragedy in Karnataka

ताजा अध्ययन में इस इस बात के भी संकेत मिले हैं कि दक्षिण कन्नड़, उडुपी, केरल, गोवा समेत महाराष्ट्र के पश्चिमी तटीय इलाके आगामी ढाई दशक में जलमग्न हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई, पांडिचेरी और तूतीकोरिन में 10 प्रतिशत से अधिक भूमि समुद्र में नष्ट हो सकती है।

स्टडी में सामने आई क्या वजह?
समुद्र के तटीय इलाकों में हाल के कुछ वर्षों में चक्रवात के चलते भारी तबाही देखने को मिली। इसकी कई वजह भी सामने आई। हाल के वर्षों में, समुद्र ने तटीय क्षेत्रों पर काफी अतिक्रमण किया है, जब भी यह अशांत होता है तो तट के पास के घरों में बाढ़ आ जाती है। कथित तौर पर समुद्र का आकार हर साल बढ़ रहा है। ऐसी रिपोर्ट्स के चलते तटीय क्षेत्रों में रहने वालों के मन में अगल ही तनाव पैदा करती हैं। साइंटिस्ट्स की मानें तो इन सब की मूल वजह पर्यावरण असंतुलन और पर्यावरण का समुचित संरक्षण न कर पाना है, जिसकी वजह से प्राकृतिक आपदाए लगातार बढ़ रही हैं।

2040 तक जलमग्न हो सकते हैं कर्नाटक के 2 शहर
एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के मंगलुरु और उडुपी 2040 तक जलमग्न हो सकते हैं। स्टडी में साइंटिस्ट्स ने आगाह किया है कि इसकी वजह लगातार समुद्र में बढ़ता जलस्तर है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2040 तक मैंगलोर और उडुपी की करीब 5 फीसदी जमीन जलमग्न हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताजा शोध सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी, बेंगलुरु द्वारा किया गया था। अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और समुद्र तट पर मानव हस्तक्षेप के खतरों पर प्रकाश डाला गया है। शोध के तहत अंतिम रिपोर्ट समुद्र के स्तर में वृद्धि और वर्तमान रुझानों पर पिछले आंकड़ों का विश्लेषण करके तैयार की गई थी। इससे भविष्य में गंभीर स्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। स्टडी में साइंटिस्ट्स ने आगाह किया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई आवासीय और कृषि क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है।

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