MUDA case: 'सिद्दारमैया को इस्तीफा देना चाहिए बाकी.....': पूर्व लोकायुक्त हेगड़े को क्यों याद आए शास्त्री जी?
कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े ने बुधवार को अपनी राय व्यक्त की कि MUDA साइट आवंटन मामले से जुड़े गंभीर आरोपों के मद्देनजर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पद छोड़ देना चाहिए। न्यायमूर्ति हेगड़े ने मुख्यमंत्री के निर्दोष होने के दावे को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय के प्रारंभिक निष्कर्ष का हवाला दिया, जिसमें भ्रष्टाचार का संकेत देने वाले साक्ष्य मिले हैं।
हेगड़े ने बेंगलुरु में मीडिया से कहा, 'यह उन (सिद्धारमैया) पर निर्भर करता है कि वे इस्तीफा दें या नहीं, लेकिन जब ऐसा गंभीर आरोप है तो मुझे लगता है कि सार्वजनिक दृष्टिकोण से उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, हालांकि कानून के अनुसार इस्तीफा न देने में कुछ भी गलत नहीं है।'

ये आरोप मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) की ओर से सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को 14 साइटों के अवैध आवंटन से पैदा हुए हैं, जिसके कारण कानूनी जांच शुरू हुई है जो अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है। न्यायालय ने मंगलवार को ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत इन आरोपों की जांच के लिए राज्यपाल की मंजूरी को बरकरार रखा है, जो पर्याप्त प्रारंभिक साक्ष्य देता है।
यह निर्णय कर्नाटक उच्च न्यायालय की ओर से अपने पिछले अंतरिम आदेश को रद्द करने के कदम के बाद आया है, जिसने जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष न्यायालय को सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायतों पर निर्णय लेने से रोक दिया था। लेकिन अब मामले की आधिकारिक जांच के लिए रास्ता साफ हो गया है।
राजनीतिक जवाबदेही के ऐतिहासिक उदाहरणों का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति हेगड़े ने 1956 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के इस्तीफे को याद किया, जिन्होंने दक्षिण भारत में एक रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने समकालीन राजनीति में इस तरह की जवाबदेही की कमी पर दुख जताया और सुझाव दिया कि सिद्धारमैया का इस्तीफा गंभीर आरोपों के सामने जिम्मेदारी लेने का एक संकेत होगा।
जस्टिस हेगड़े का कहना है कि 'मुख्यमंत्री की जांच की मंजूरी MUDA मामले में दी गई थी, जहां उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं। इस पृष्ठभूमि में मुझे लगता है कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। बाकी सब उनके ऊपर छोड़ दिया गया है'।












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