चंद्रयान-3 व Gaganyaan के बाद ISRO का शुक्रयान रचेगा इतिहास, जानिए Shukra Mission का मकसद
what is next mission of isro: Chandrayaan-3 Mission Soft-landing के बाद ISRO का पूरा फोकस मानव रहित मिशन Gaganyaan पर रहेगा। फिर इसरो का shukrayaan mission भी इतिहास रचेगा।
Shukrayaan Mission After Chandrayaan-3: चांद पर 23 अगस्त 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर Chandrayaan-3 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग करवाने के बाद भी ISRO के वैज्ञानिकों को फुरसत नहीं मिलने वाली है। अब इसरो वैज्ञानिक गगनयान व शुक्रयान जैसे महत्वकांक्षी मिशन से इतिहास रचने की तैयारी में हैं।
चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला और चांद पर पहुंचने वाले रूस, अमेरिका व चीन के दुनिया बाद चौथा देश बनने वाले भारत के शुक्रयान मिशन के बारे में जानिए।

इसरो का शुक्रयान मिशन क्या है?
- Shukrayaan-1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का एक ऑर्बिटर मिशन होगा। इसके वैज्ञानिक पेलोड में वर्तमान में एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और एक ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार शामिल हैं।
- इसरो के Shukrayaan-1 मिशन का मकसद सौरमंडल के सबसे चमकीले ग्रह शुक्र के बार में और अधिक जानकारी हासिल करना है।
- शुक्रयान भारत का पहला शुक्र मिशन होगा। इसरो ने शुक्रयान लॉन्च करने का समय जून, 2023 तय किया था, मगर कोविड-19 के कारण इसकी लॉन्चिंग में देरी हुई है।
- अब इसरो द्वारा शुक्रयान मिशन को साल 2024 या 2026 में लॉन्च किया सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई समय तय तय नहीं हुआ है।
शुक्र पर भेजे गए दुनिया के मिशन
- अमेरिका: मेरिनर शृंखला वर्ष 1962-1974, वर्ष 1978 में पायनियर वीनस- 1, पायनियर वीनस- 2 और वर्ष 1989 में मैगेलन।
- रूस: वेनेरा की अंतरिक्षयान शृंखला वर्ष 1967-1983, वर्ष 1985 में वेगास- 1 और वेगास- 2
- जापान: वर्ष 2015 में अकात्सुकी
- यूरोप: वर्ष 2005 में वीनस एक्सप्रेस
शुक्र मिशन की खास बातें
- शुक्र ग्रह प्रत्येक 19 माह में एक बार पृथ्वी के सबसे निकट होता है, जो किसी भी शुक्र मिशन के लॉन्च हेतु सबसे उपयुक्त समय होता है।
- यही कारण है कि यदि इसरो साल 2024 में शुक्रयान-1 को लॉन्च नहीं कर पाता तो फिर वर्ष 2026 और 2028 में 'बैकअप' लॉन्च का समय है।
- शुक्र मिशन के लिए उपयुक्त समय जो लिफ्ट ऑफ पर आवश्यक ईंधन की मात्रा को कम करता है, वो प्रत्येक आठ वर्ष में आता है। ऐसे में वर्ष 2031 को विशेषज्ञों द्वारा शुक्र मिशन के लिए सबसे उपयुक्त लॉन्च समय माना जा रहा है।
शुक्रयान से ज्यादा फोकस गगनयान पर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसरो के शुक्रयान मिशन में देरी हो सकती है। इसकी वजह यह भी मानी जा रही है कि इसरो के वैज्ञानिकों का पूरा फोकस चंद्रयान 3 मिशन के बाद गगनयान मिशन पर रहेगा, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भारत अपने दम पर अंतरिक्ष में भेजेगा।
दरअसल, इसरो शुक्रयान मिशन में एक सस्पेसक्राफ्ट बनाएगा, जो शुक्र ग्रह के चारों ओर चक्कर लगाते हुए जानकारी जुटाएगा। शुक्रयान की लॉन्चिग का समय दिसम्बर 2024 तय किया था, मगर इसमें देरी होती दिख रही। यह भी हो सकता है कि शुक्रयान मिशन को साल 2013 तक के लिए टाल दिया जाए।












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