Shubhanshu Shukla बने अंतरिक्ष के पहले भारतीय किसान, ISS में की मेथी और मूंग की खेती, कब होगी धरती पर वापसी?

Shubhanshu shukla News: धरती पर होगी वापसी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला Axiom-4 मिशन के तहत बीते 12 दिन से हैं। 12 दिन के प्रवास के बाद 10 जुलाई के बाद शुभांशु शुक्‍ला और उसके साथी किसी भी दिन धरती पर वापसी कर सकते हैं। नासा द्वारा फ्लोरिडा तट पर मौसम की स्थिति के आधार पर जल्द ही अंतरिक्ष मिशन के अनडॉक करने की तारीख घोषित करेंगे।

शुभांशु शुक्‍ला ने आईएसएस स्‍पेस सेंटर में अपने प्रवास के अंतिम सप्‍ताह में किसान बन चुके हैं। शुभांशु शुक्ला ने एक रिसर्च के तहत अंतरिक्ष में खेती करने का प्रयास किया। जिसके बाद शुभांशु शुक्‍ला अबअंतरिक्ष के पहले भारतीय किसान बन चुके हैं।

Shubhanshu shukla

शुभांशु शुक्‍ला ने स्‍पेस सेंटर में आईएसएस पर मूंग और मेथी के बीज उगाए हैं। उन्होंने पेट्री डिश में अंकुरित हो रहे बीजों की तस्वीरें भी खींची हैं और उन्हें ISS पर एक स्टोरेज फ्रीजर में रख दिया। यह अंतरिक्ष में हो रहे एक शोध का हिस्सा है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि सूक्ष्म माइक्रोग्रैविटी के अंकुरण और पौधे के शुरुआती विकास को कैसे प्रभावित करता है।

एक्सिओम स्पेस (Axiom Space) की चीफ साइंटिस्ट लूसी लो (Lucie Low) के साथ बातचीत में शुभांशु शुक्ला ने कहा, 'मुझे बहुत गर्व है कि इसरो (ISRO) देश भर के राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग करने और कुछ शानदार शोध करने में सक्षम रहा है। मैं सभी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए स्टेशन पर यह काम कर रहा हूं। यह रोमांचक और खुशी की बात है।'

वापसी के बाद बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा

एक्सिओम स्पेस (Axiom Space) ने एक बयान में कहा कि पृथ्वी पर वापस आने के बाद, बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा जिससे उनके आनुवंशिकी, माइक्रोबियल पारिस्थितिक तंत्र और पोषण प्रोफाइल में बदलावों की जांच की जा सकेगी। अंकुर प्रयोग का नेतृत्व धारवाड़ कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के वैज्ञानिक सुधीर सिद्दापुरेड्डी कर रहे हैं। इस प्रयोग में छह किस्मों को मिशन के बाद कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा। इसका लक्ष्य अंतरिक्ष में टिकाऊ खेती के लिए आनुवंशिक विश्लेषण के लिए वांछनीय लक्षणों वाले पौधों की पहचान करना है।

अंतरिक्ष में माइक्रोएल्गी पर भी शुभांशु शुक्ला ने किया प्रयोग

एक अन्य प्रयोग में शुभांशु शुक्ला ने माइक्रोएल्गी को संग्रहीत किया! माइक्रोएल्गी पर भोजन, ऑक्सीजन और यहां तक कि जैव ईंधन का उत्पादन करने की क्षमता के लिए शोध किया जा रहा है। उनकी लचीलापन और बहुमुखी प्रतिभा उन्हें लंबी अवधि के मिशनों पर मानव जीवन का सहयोग करने के लिए आदर्श बनाती है। माइक्रोएल्गी एक प्रकार की शैवाल है।

शुभांशु शुक्‍ला ने कहा कि वह स्टेम सेल पर अध्ययन के बारे में "वास्तव में उत्साहित" हैं। इसके तहत, वैज्ञानिक यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सप्लीमेंट्स जोड़कर स्टेम कोशिकाओं में विकास, रिकवरी और मरम्मत की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है।

शुभांशु शुक्‍ला की कब होगी धरती पर वापसी?

नासा (NASA) ने अभी तक एक्सिओम-4 (Axiom-4) के अंतरिक्ष स्टेशन से अलग होने की तारीख की घोषणा नहीं की है। यह मिशन ISS से 14 दिनों तक जुड़ा रहेगा।

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