शिवसेना-आरएसएस के लिए राम मंदिर निर्माण नहीं, कश्मीर है प्राथमिकता
नई दिल्ली: शिवसेना ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) फिलहाल राम मंदिर निर्माण को अस्थायी तौर पर किनारे रखकर कश्मीर को प्राथमिकता देगी। उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए ये बात कही। शिवसेना ने आरएसएस के इस रुख का समय के अनुकुल बताया है। शिवसेना ने अपने मुख पत्र सामना में लिखा कि संघ परिवार ने राम मंदिर के मुद्दे को किनारे रखकर पुलवामा और कश्मीर जैसे विषयों पर ध्यान देने का फैसला किया है। आरएसएस का यह भी मानना है कि कश्मीर की समस्याएं सुलझाने के लिए देश को एक मजबूत और स्थिर सरकार की जरूरत है। आतंकवाद को तब तक नहीं हराया जा सकता जब तक केंद्र में स्थिर सरकार और एक मजबूत प्रधानमंत्री नहीं होगा।

शिवसेना ने कहा कि ये देश में मौजूदा विमर्श के अनुकूल है। कांग्रेस एवं अन्य पार्टियों का प्रस्तावित महागठबंधन देश में कभी स्थिरता और शांति नहीं ला सकता है। शिवसेना ने एक खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि संघ अब चाहता है कि उसके स्वयंसेवक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बारे में बात करने की बजाय पुलवामा हमले के बारे में लोगों को जागरूक करें। गौरतलब है कि इस हफ्ते महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा-शिवसेना का गठबंधन हुआ है । गठबंधन के बाद शिवसेना का रूख बीजेपी के प्रति थोड़ा नरम हो गया है।

शिवसेना अपने संपादकीय में आगे लिखा कि भगवान से ज्यादा महत्वपूर्ण देश होता है। हालांकि, शिवसेना ने सवाल किया कि क्या राम मंदिर 2019 के चुनावों के बाद भी बनेगा। शिवसेना ने आगे कहा कि अब आरएसएस को लग रहा है कि लोगों का ध्यान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 370 को खत्म करने जैसे मुद्दों से हटाकर कश्मीर और पुलवामा जैसे मुद्दों और एक स्थिर सरकार चुनने की तरफ आकृष्ट किया जा सकता है।
शिवसेना ने कश्मीर के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले अब हालात 70 साल के पहले से भी ज्यादा खराब हैं। कश्मीरी पंडितों की 'घर वापसी' के बारे में तो भूल ही जाएं, अब मुस्लिम युवा भी रोजगार की तलाश में कश्मीर से पलायन कर रहे हैं। आतंकवाद के कारण अब कश्मीरी नौजवान रोजगार की तलाश में कश्मीर से बाहर जाने लगे हैं।












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