शेहला रशीद का देशद्रोहियों से रिश्ते रखने के आरोपों से पहले किन विवादों से जुड़ चुका है नाम ?
नई दिल्ली- जेएनयू छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद का विवादों से नाता काफी पुराना है। इस बार उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा ने जो उन पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं, उस तरह से मिलते-जुलते आरोप उनपर पहले से भी लगते रहे है। उनपर वामपंथी विचारों से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लग चुके हैं और कई बार पहले भाजपा के बड़े नेताओं ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोला है। लेकिन, खुद को बुद्धिजीवियों की मसीहा के तौर पर पेश करती रहने वाली शेहला ने कभी भी विवादों का पीछा नहीं छोड़ा है और हर बार उनकी बातों के चलते एक नया विवाद खड़ा हुआ है।
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पहले से लगते रहे हैं राष्ट्रविरोधी विचारों को हवा देने के आरोप
खुद को छात्र ऐक्टिविस्ट की तरह पेश करने वाली शेहला रशीद पर जेएनयू में पढ़ाई के दौरान भी राष्ट्रविरोधी विचारों को हवा देने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। खैर, इस बार इसे इसलिए गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि आरोप लगाने वाले खुद उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा हैं, जिन्होंने उनके तार आतंकवादियों से जुड़े होने की बात कहकर सनसनी मचा दी है। जाहिर है कि शेहला ने इसे पारिवारिक विवाद बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। लेकिन, शेहला वही ऐक्टिविस्ट हैं, जो अपनी कथित 'अभद्र' भाषा के लिए विरोधियों के निशाने पर रहती हैं। कई दक्षिणपंथी संगठनों का आरोप रहा है कि छात्रों में देश-विरोधी भावनाएं भड़काना इनका पेशा रहा है। पहले लगे आरोपों के मुताबिक भी यह अपनी कथनी और करनी से आतंकवादियों और नक्सलवादियों को नैतिक समर्थन देती हैं। इनपर जेएनयू में देश की सेना के खिलाफ बातें कहने के भी आरोप लग चुके हैं। इनके खिलाफ देशभर में घूम-घूम कर दलितों और अल्पसंख्यकों को उकसाने के भी आरोप लग चुके हैं।

प्रधानमंत्री के खिलाफ कर चुकी हैं आपत्तिजनक टिप्पणी
शेहला रशीद पर आरोप है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर बेहद विवादास्पद और आपत्तिजनक टिप्पणियां करती हैं। जब पुणे के एल्गार परिषद मामले में माओवादियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचे जाने की जांच में कुछ गंभीर तथ्यों का खुलासा हुआ था, तब शेहला रशीद ने ट्विटर पर पीएम मोदी को 'मास मर्डर' बताया था और आरोप लगाया था कि इस केस के जरिए वह विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं। 9 जून, 2018 का उनका यह ट्वीट खूब वायरल हुआ था।

धार्मिक भावना भड़काने का लग चुका है आरोप
शेहला रशीद पर हिंदू धर्म के अपमान करने के आरोप भी लग चुके हैं। इस मसले पर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह चुनाव आयोग तक से शिकायत कर चुके हैं। यह विवाद तब का है जब 2019 के आम चुनाव में गिरिराज सिंह बिहार के बेगूसराय में चुनाव लड़ रहे थे और शेहला रशीद सीपीआई उम्मीदवार और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का प्रचार करने वहां पहुंची थीं। तब एक कथित वायरल वीडियो के जरिए दावा किया गया कि शेहला ने बरौनी के बिढ़ानिया बाजार में कहा कि बड़े शहरों में हिंदू-मुसलमान साथ में दारू पीते हैं और बीफ खाते हैं। वनइंडिया उस वीडियो में कही गई बातों की पुष्टि नहीं करता है। लेकिन, तब गिरिराज सिंह ने उनपर आरोप लगाया था कि 'भारत में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदू धर्म को गाली दी जाती है और शेहला रशीद ने वही किया। हम गाय की पूजा करते हैं, उसका मांस नहीं खाते।.......ये अब अति हो रहा है, जिसे यह देश स्वीकार नहीं करेगा।'

फेक न्यूज प्रसारित करने के भी लगे हैं आरोप
शेहला रशीद पर फेक न्यूज प्रसारित करने और अफवाहों को हवा देने के भी आरोप लगते रहे हैं। इसी तरह के एक मामले में पिछले साल फरवरी में उनपर उत्तराखंड के देहरादून में पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीर की कुछ मुस्लिम छात्राओं को भीड़ के द्वारा घेर लिए जाने की झूठी खबर फैलाने के भी आरोप फैलाकर भय का माहौल पैदा करने के आरोप लग चुके हैं। विरोधियों में 'फ्रीलांस प्रोटेस्टर' के नाम से चर्चित शेहला पर इसी तरह कठुआ कांड में पीड़ित की मदद के नाम धन जुटाने के बारे में गलतबयानी के आरोप लग चुके हैं। उनपर इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों के भी आरोप लगे थे।

भाजपा ने लगाया था कोरोना वॉरियर्स के अपमान का आरोप
इसी तरह इस साल 5 अप्रैल को कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी जान की परवाह किए बगैर देश सेवा में जुटे कोरोना वॉरियर्स के लिए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 9 बजे देशवासियों से दीया या मोमबत्ती अथवा टॉर्च जलाने का आह्वान किया था, तब भी उन्होंने उसका मजाक उड़ाने की कोशिश की थी, जिसको लेकर भाजपा ने उनपर हमला भी बोला था।












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