संसद से बाहर सरकार से सवाल पूछने वाले बीजेपी के 'शत्रु' का संसद के अंदर का परफॉर्मेंस 'जीरो'
नई दिल्ली- पटना साहिब (Patna Sahib) से बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) का पार्टी छोड़कर कांग्रेस के हाथ पकड़ने में अब मात्र औपचारिकता भर बाकी है। 16वीं लोकसभा में वे अपनी ही सरकार, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बहुत ही मुखर रहे। लेकिन, लोकसभा के रिकॉर्ड से पता चलता है कि संसद के अंदर उन्होंने उतने ही मौनी बाबा बनकर अपना समय काटा है। एक सांसद के रूप में प्राथमिक जिम्मेदारी निभाने में उनका मौजूदा कार्यकाल सबसे खराब रहा है। अलबत्ता सांसद निधि खर्च करने में उनका रिकॉर्ड बहुत ही अच्छा है।

16वीं लोकसभा में फिसड्डी रहे बिहारी बाबू
अगर पिछले पांच साल में सांसद शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha)की प्राथमिक जिम्मेदारी पर नजर डालें तो उन्होंने लोकसभा में जन प्रतिनिधि होने के नाते न तो एक भी सवाल पूछे, न ही संसद में किसी बहस में हिस्सा लिया और न ही कोई प्राइवेट मेंबर बिल ही सदन में पेश किया। अगर संसद सत्र के दौरान सदन में उनकी उपस्थिति की बात की जाय तो भी उनका रिकॉर्ड अच्छा नहीं कहा जा सकता। लोकसभा में वे सिर्फ 67% मौके पर ही मौजूद रहे। जबकि इसी दौरान उनके कुछ साथी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड उनसे काफी बेहतर है। मसलन, बीजेपी के विजय गावित ने 1,096, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने 1,025 और कांग्रेस के राजीव शंकरराव साटव ने इसी अवधि में 1,115 सवाल पूछे।
अभिनेता से राजनेता बने बिहारी बाबू 15वीं लोकसभा में भी पटना साहिब सीट का बीजेपी के टिकट पर नुमाइंदगी कर चुके हैं। वे 1996 से 2008 तक राज्यसभा में भी रहे। हालांकि, लोकसभा का रिकॉर्ड बताता है कि उनका पहला कार्यकाल भी संसद के अंदर जिम्मेदारी निभाने के नाते बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता। 15वीं लोकसभा में उन्होंने कुल 67 सवाल पूछे थे और 9 मौकों पर बहस में हिस्सा लिया था। गौरतलब है, कि उनका ये रिकॉर्ड तब है, जब वे केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और जहाजरानी मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री का जिम्मा भी संभाल चुके हैं।

संसद में सवाल पूछना क्यों है जरूरी?
संसद में सवाल पूछने का अधिकार जनप्रतिधियों के पास वो हथियार है, जिसके माध्यम से वो अपने क्षेत्र और देश की जनता को सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों, प्रोजेक्ट्स से रूबरू करा सकता है और जनता की समस्याओं से संसद को भी अवगत करा सकता है। इस अधिकार के माध्यम से ही एक सांसद अपनी सरकार को जनता के प्रति जिम्मेदार बनाता है। इतना ही नहीं संसद में हर बहस का एक रिकॉर्ड रखा जाता है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में आने वाले सांसद भी अपनी जरूरतों के हिसाब से कर सकते हैं।
यहां क्लिक करके देखिए कैसा है शत्रुघ्न सिन्हा का रिपोर्ट कार्ड?

संसद से बाहर सरकार को जरूर घेरते रहे
दिलचस्प बात ये है कि 16वीं लोकसभा में बीजेपी के 'शत्रु' अपनी ही सरकार को 'खामोश' कराने का कोई भी मौका नहीं चूके। वे सार्वजनिक तौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों की आलोचना करते रहे। विरोधी दलों के मंच से भी अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ हल्ला बोला, लेकिन जिस काम के लिए मतदाताओं ने जिताकर लोकसभा भेजा वही करना भूल गए। पिछले कुछ समय से तो उन्होंने बीजेपी के सियासी 'शत्रुओं' को ही अपना सबसे बड़ा रहनुमा बना लिया है, जिसमें राहुल, लालू, ममता बनर्जी से लेकर ममता बनर्जी तक शामिल हैं। माना जा रहा है कि शनिवार को वो औपचारिक तौर पर कांग्रेस का हाथ थामकर फिर से पटना साहिब लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

सांसद निधि कर्च करने में अव्वल रहे 'शॉटगन'
संसद के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में शत्रुघ्न भले ही पीछे दिखाई पड़ते हों, लेकिन क्षेत्र के विकास के लिए खर्च किए जाने वाले सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (Member of Parliament Local Area Development-MPLAD) के इस्तेमाल में उनका रिकॉर्ड बहुत ही अच्छा रहा है। बीते पांच वर्षों में केंद्र सरकार से मंजूर सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLAD) का 106.83 हिस्सा उपयोग करवा चुके हैं। इंडिया टुडे के मुताबिक 27 मार्च 2019 तक के आंकड़े के मुताबिक 16वीं लोकसभा में सांसदों ने इसपर औसतन 91.84% ही खर्च किया है। इसी बार नहीं पिछली लोकसभा में भी बिहारी बाबू ने सांसद निधि से अपने क्षेत्र के विकास पर 107.91% राशि खर्च की थी।












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