चीन के विवादित मैप पर एस जयशंकर को मिला शशि थरूर का साथ, दिया ये सुझाव
जिस तरह से चीन ने विवादित मैप जारी किया है उसके खिलाफ विदेश मंत्रालय ने खुलकर बयान दिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस तरह के निराधार दावे करना चीन की आदत में शुमार है।
वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीन के विवादित मैप को खारिज करते हुए कहा कि बीजिंग पहले भी इस तरह के मैप जारी कर चुका है और उन श्रेत्रों को अपना बता चुका है जो उसका है नहीं, चीन की यह पुरानी आदत है। विदेश मंत्री के बयान का कांग्रेस नेता शशि थरूर ने समर्थन किया है और उन्हें चीन को लेकर खास सुझाव दिया है।

शशि थरूर ने सुझाव दिया है कि जिस तरह से चीन ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपने मैप में शामिल किया है उसके जवाब में तिब्बत के जिन लोगों के पास चीन का पासपोर्ट है उन लोगों को भारत की ओर से स्टैपल वीजा जारी करना चाहिए और चीन की वन चायना पॉलिसी का विरोध करना चाहिए।
विदेश मंत्री एस जयशंकर का समर्थन करते हुए शशि थरूर ने ट्वीट करके लिखा, जयशंकर आप सही हैं, यह चीन की पुरानी आदत है, वो हमारे विरोध को भी नजरअंदाज करते हैं। क्या हम इसे ऐसे ही छोड़ देंगे। क्या हम अपनी नाराजगी किसी और तरह से नहीं दिखा सकसते हैं। क्यों ना हम तिब्बत के जिन लोगों के पास चीनी पासपोर्ट है उन्हें स्टैपल वीजा जारी करना शुरू कर दें और चीन के वन चायना नीति का समर्थन करना बंद कर दें।
इससे पहले एस जयशंकर ने कहा कि हमारा क्षेत्र क्या है इसको लेकर हम पूरी तरह से स्पष्ट हैं। हमे अपने क्षेत्र की रक्षा करने के लिए क्या करना है इसको लेकर भी सरकार पूरी तरह से स्पष्ट है। इसे आप हमारे बॉर्डर पर देख सकते हैं। निराधार दावा करने से दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता है, हमे इसको लेकर बिल्कुल स्पष्ट रहना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, ना ही यह कुछ नया है। यह 1950 से शुरू हुआ है। ऐसे में एक मैप में भारत के हिस्से को अपना बता देने से कुछ नहीं बदलने वाला है। यह हिस्सा पूरी तरह से भारत का है।












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