'भारत अगर मर गया, तो कौन जिएगा?', पंडित नेहरू की बात दोहराकर Shashi Tharoor ने किसे घेरा?

Shashi Tharoor statement Congress: जब देशहित और दलगत राजनीति के बीच टकराव हो, तो एक नेता का राष्ट्रवादी रुख अक्सर विवादों का कारण बन जाता है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा ही बयान दिया है जो पार्टी लाइन से थोड़ा अलग लेकिन देश की एकता और सुरक्षा के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। उनका स्पष्ट संदेश है , पहले देश, फिर दल। इस सोच ने जहां उन्हें आम जनता के बीच सराहना दिलाई है, वहीं पार्टी के अंदर एक बार फिर असहजता पैदा कर दी है।

सांसद शशि थरूर ने शनिवार (19 जुलाई) को कहा कि देश को हमेशा पार्टी हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए। कोच्चि में एक स्कूल छात्र के सवाल का जवाब देते हुए थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उद्धृत करते हुए कहा, 'भारत अगर मर गया, तो कौन जिएगा?' उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय एकता राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर होनी चाहिए।

Shashi Tharoor statement

मैं अपने विचार पर कायम हूं- थरूर

'शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सांसद शशि थरूर ने कहा कि, 'आपकी पहली निष्ठा किसके प्रति है? मेरे विचार में, राष्ट्र सर्वप्रथम होना चाहिए। राजनीतिक पार्टियां राष्ट्र को बेहतर बनाने का एक माध्यम मात्र हैं। इसलिए, आप चाहे किसी भी पार्टी से जुड़े हों, उसका उद्देश्य अपने-अपने तरीकों से एक बेहतर भारत का निर्माण करना होना चाहिए।'

थरूर ने आगे कहा, 'राजनीतिक दल इस बात पर असहमत हो सकते हैं कि देश को बेहतर बनाने का सबसे उपयुक्त तरीका क्या है, और उन्हें इसका पूरा अधिकार है। लेकिन जहां तक मेरी बात है, मैंने हमेशा देश की सशस्त्र सेनाओं और सरकार का समर्थन किया है खासकर तब, जब हमारी सीमाओं पर खतरा मंडरा रहा हो या देश की सुरक्षा को चुनौती मिली हो।'मेरे इस रुख की वजह से कई लोगों ने मेरी आलोचना की है, लेकिन मैं अपने विचार पर कायम हूं, क्योंकि मुझे विश्वास है कि यही राष्ट्रहित में है।

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थरूर के अंतरराष्ट्रीय रुख पर कांग्रेस के भीतर उठे सवाल

हाल ही में जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' की गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंची, तब कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ. शशि थरूर ने एक अहम भूमिका निभाई। वह अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों में एक क्रॉस-पार्टी (दलीय सीमाओं से परे) प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की तरफ से वहां के नेताओं, थिंक टैंक्स और मीडिया के सामने यह संदेश देने पहुंचे कि भारत आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और इस लड़ाई में सरकार और सेना को पूर्ण समर्थन प्राप्त है।

थरूर ने इन मंचों पर यह भी साफ किया कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तो भारत की राजनीतिक विचारधाराएं एकजुट होनी चाहिए, ताकि वैश्विक मंच पर देश की छवि कमजोर न पड़े और पाकिस्तान जैसे देशों के आतंकी नेटवर्कों पर सख्त अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। इस घटना के बाद से ही कांग्रेस पार्टी के अंदर से कई नेताओं ने थरूर पर 'निजी प्रचार की राजनीति', 'पार्टी लाइन की अनदेखी', और 'सरकार के नजदीक जाने की कोशिश' जैसे आरोप लगाए।

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