कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस में शशि थरूर भी होंगे शामिल, जल्द कर सकते हैं ऐलान
नई दिल्ली, 30 अगस्त। कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर अभी भी पार्टी के भीतर मंथन चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में कई नाम आगे चल रहे हैं। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि राजस्थान के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। लेकिन अब इस रेस में शशि थरूर का नाम भी सामने आया है। सूत्रों की मानें तो शशि थरूर भी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए आवेदन कर सकते हैं, हालांकि अभी उन्होंने इसपर आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही शशि थरूर इसपर फैसला ले सकते हैं।
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वहीं इस बारे में जब शशि थरूर से पूछा गया तो उन्होंने इसपर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। हाल ही में शशि थरूर ने मलयाली भाषा में एक आर्टिकल लिखा था, जिसमे उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बात की। मातृभूमि में लिखे आर्टिकल में उन्होंने कहा कि आदर्श तौर पर पार्टी को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की एक दर्जन सीटों पर चुनाव का ऐलान करना चाहिए, जिनका चुनाव लंबित है। गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा हो रही है। कांग्रेस के नए अध्यक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार करने के साथ मतदाताओं को प्रेरित करना भी है।
गौर करने वाली बात है कि शशि थरूर उन 23 कांग्रेस नेताओं की लिस्ट में शामिल हैं जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में संगठन स्तर पर बदलाव की वकालत की थी। थरूर ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि अभी भी कांग्रेस को एक नए अध्यक्ष की जरूरत है तो पार्टी को नई ऊर्जा से भरे, पार्टी को इसकी सख्त जरूरत है। कई नेताओं ने अपने आप को इस पद के लिए आगे बढ़ाया है, इन नेताओं ने पार्टी को लेकर अपना विजन दिया है, मुझे भरोसा है कि पार्टी और देश के लिए इन नेताओं ने अपने दृष्टिकोण को सामने रखा है, जोकि जनहित के जागरण को जगाएगा।
थरूर ने कहा कि पार्टी को नवीनीकरण की जरूरत है, इसमे सबसे अधिक जरूरी पार्टी के अध्यक्ष पद का है। पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखें तो जो भी पार्टी की कमान संभालता है उसे पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ मतदाताओं को प्रेरित करना होगा। जो भी पार्टी का अध्यक्ष बने उसे पार्टी के लिए अपने विजन को सामने रखना होगा, उसे पार्टी के भीतर की समस्याओं को खत्म करना होगा। आखिरकार राजनीतिक दल देश की सेवा का एक माध्यम हैं, नाकि खुद के अंत का।












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