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Shashi Tharoor को पुराने शिकवे भूल PM Modi लगा रहे गले, थरूर से यारी के पीछे BJP का मिशन दक्षिण?

Shashi Tharoor: ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताने के लिए जाने वाली डेलिगेशन टीम में शशि थरूर के नाम का विरोध खुद कांग्रेस (Congress) पार्टी कर रही है। इधर बीजेपी ने (BJP) विरोध को दरकिनार कर कांग्रेस सांसद को सात में से एक डेलिगेशन के नेतृत्व सौंप दिया है। थरूर ने भी इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया है। आज से कुछ साल पहले स्थितियां बिल्कुल अलग थीं और पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने थरूर और सुनंदा पुष्कर के रिश्ते को लेकर जमकर तंज कसे थे। दूसरी ओर थरूर भी खुलकर मोदी की आलोचना करते थे। हालांकि, 2014 के बाद से स्थिति बदलने लगी है और दोनों ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे की तारीफ की है।

Shashi Tharoor पर BJP की मेहरबानी

शशि थरूर पर बीजेपी की मेहरबानी एकतरफा नहीं है। कांग्रेस में अपनी स्थिति और लगातार दरकिनार किए जाने की वजह से खुद थरूर ऊी कहीं न कहीं गहरे असंतोष से भरे हुए हैं। यही वजह है कि कई बार वह पार्टी लाइन से बाहर जाकर भी बायान देते नजर आए हैं। दूसरी ओर पीएम मोदी अपनी छवि राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए दलीय मतभेदों को भुलाने वाले नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं। थरूर के अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में काम करने और कूटनीतिक अनुभव को देखते हुए पीएम उनकी प्रशंसा करते रहे हैं। हालांकि, केरल की राजनीति और दक्षिण भारत में बीजेपी के मजबूत होने की महत्वाकांक्षा का कनेक्शन भी थरूर से है। समझें बीजेपी का रुख कांग्रेस सांसद के प्रति कैसे उदार होता चला गया है।

Shashi Tharoor

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दक्षिण भारत और केरल के लिए बीजेपी का चाहिए चेहरा

इसमें कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से बीजेपी ने अपने जनाधार में लगातार विस्तार किया है और उत्तर भारत के हिंदी पट्टी से निकलकर बंगाल, नॉर्थ ईस्ट और दक्षिण भारत में भी अपने जनाधार का विस्तार किया है। 2024 लोकसभा चुनाव में केरल में पार्टी पहली बार कोई सीट जीतनें मे सफल रही है और दूसरी ओर तमिलनाडु में पार्टी का वोट फीसदी बढ़ा है। शशि थरूर और अन्नामलाई जैसे शिक्षित और वरिष्ठ पदों पर रहे चेहरे दक्षिण भारत में बीजेपी के लिए जनाधार बढ़ाने, युवा वोटर्स को आकर्षित करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

शशि थरूर का कूटनीतिक अनुभव

पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद से अपनी अंतर्राष्ट्रीय छवि बनाने का भी काम किया है। बीजेपी में इस वक्त ऐसा कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो कूटनीतिक और विदेश मामलों में शशि थरूर के बराबर कद का हो। थरूर ने यूएन में लंबे समय तक काम किया है और उनके पास विशाल कूटनीतिक अनुभव है, जो पीएम मोदी और बीजेपी के लिए काम का साबित हो सकता है।

शशि थरूर की सॉफ्ट हिंदुत्व वाली छवि

विदेश से पढ़े-लिखे होने और कांग्रेस पार्टी की राजनीति करने के बावजूद भी थरूर अपने हिंदुत्ववादी पहचान को लेकर मुखर रहते हैं। वह खुलकर धार्मिक होने और भारतीय वेदों, दर्शन के गंभीर अध्येता के तौर पर अपने-आप को पेश करते हैं। सबरीमाला में उन्होंने महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया था और हिंदी भाषा को लेकर उनका रुख स्टालिन या दूसरे भारतीय नेताओं जितना कड़ा नहीं है। यही वजह है कि उनके व्यक्तित्व का यह पक्ष भी बीजेपी के लिए लुभाने वाला है।

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