शरद यादव: यंग इंजीनियरिंग ग्रेजुएट जिसे, जेपी ने इंदिरा के खिलाफ मैदान में उतारा

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नई दिल्ली। बिहार में लालू यादव का साथ छोड़कर नीतीश कुमार के एनडीए के साथ जाने के बाद शरद यादव और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के संबंधों में खटास आ गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जल्दी ही शरद यादव जेडीयू को अलविदा कह देंगे। शरद यादव का नाम देश के उन नेताओं में शुमार है जिनके संबंध पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के नेताओं से अच्छे रहे हैं। शरद यादव लंबे समय तक एनडीए के संयोजक रहे  फिर भी यूपीए के नेताओं से उनके संबंध अच्छे हैं। शरद यादव का राजनीतिक जीवन काफा दिलचस्प रहा है। कभी उन्होंने सत्ता का स्वाद भी चखा तो कई बार विपक्ष में भी बैठे।

1974 में पहली बार बने सांसद

1974 में पहली बार बने सांसद

शरद यादव के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1971 में उस वक्त हुई जब वह जबलपुर मध्यप्रदेश में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। छात्र नेता के तौर पर उन्होंने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। उनके जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब जय प्रकाश नारायण ने उनके जैसे यंग इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को इंदिरा गांधी और कांग्रेस के खिलाफ चुनावी मैदान में 1974 में उतारा। शरद यादव जय प्रकाश नारायण की उम्मीद पर खरे उतरे और पहली बार 1974 में मध्यप्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।

1977 में दोबारा लोकसभा चुनाव जीते

1977 में दोबारा लोकसभा चुनाव जीते

शरद यादव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एचडी देवगौड़ा, गुरुदास दासगुप्‍ता, मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव के साथ की थी। जबलपुर चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद देश का आपातकाल देखना पड़ा इस बीच शरद यादव की लोकप्रियता का ग्राफ भी बढ़ता रहा। हिंदी बेल्ट में शरद यादव की धाक बढ़ने लगी थी। शरद यादव 1977 में मध्यप्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से दोबारा चुनाव जीते। इसी साल पहली बार लालू प्रसाद यादव भी लोकसभा पहुंचे थे। और रामविलास पासवान भी बिहार के हाजीपुर से रिकॉर्ड मतों से जीत कर आए थे। उस समय नीतीश कुमार में राजनीति में एक्टिव हो गए थे।

बिहार, यूपी और एमपी तीनों राज्यों से बने सांसद

बिहार, यूपी और एमपी तीनों राज्यों से बने सांसद

राजनीति की पहली सीढ़ी कही जाने वाली छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाले शरद यादव ने बिहार की राजनीति में भी बड़ा मुकाम हासिल किया है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और फिर बिहार में अपना राजनीतिक परचम लहराने वाले शरद यादव एक बार फिर से कुछ नया राजनीतिक गणित सेट करने में लगे हैं। सात बार लोकसभा में पहुंचने वाले शरद यादव 1986 में वे राज्यसभा से सांसद चुने गए। जिसके बाद 1989 में यूपी की बदायूं से लोकसभा चुनाव जीते थे।

1997 में जनता दल के अध्यक्ष चुने गए

1997 में जनता दल के अध्यक्ष चुने गए

शरद यादव, लालू यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान की राजनीतिक जीवन साथ-साथ ही चलता रहा है कभी ये साथ रहे हैं तो कभी विरोधी। 1991 से 2014 तक शरद यादव बिहार की मधेपुरा सीट से सांसद रहे । 1995 में उन्हें जनता दल का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया और 1996 में वह पांचवी बार लोकसभा का चुनाव जीते थे। 1997 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। 1998 में उन्‍होंने जॉर्ज फर्नांडीस की मदद से जनता दल यूनाइटेड बनाई, जिसमे नीतीश कुमार जनता दल छोड़कर जुड़ गए थे।

लालू यादव को किया था चित

लालू यादव को किया था चित

शरद यादव ने 1999 में देश के नागरिक उड्डयन मंत्री बने फिर 2001 में उन्होंने केंद्रीय श्रम मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मधेपुरा सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। अभी के राजनीतिक हालात में शरद यादव और आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव की नजदिकियां बढ़ रही है । एक बार मधेपुरा लोकसभा सीट से शरद यादव ने लालू यादव को चारों खाने चित कर दिया था।

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English summary
sharad yadav in depth,complete profile and career
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