उस जांबाज IPS की भूमिका में नजर आएंगे शाहरुख खान जिसने डकैत ददुआ को किया था ढेर
डकैत ददुआ को ढेर करने वाले IPS के रोल में शाहरुख
नई दिल्ली। बॉलीवुड पर बिहार का एक्स फैक्टर हावी है। सुपर 30 के बाद बिहार का एक 'सुपर कॉप' सिनेमा के पर्दे पर उतरने वाला है। इस जांबाज आइपीएस की दिलेरी के कई किस्से मशहूर हैं। डकैत और अपराधी इसके नाम से थर्राते थे। बिहार के रहने वाले और उत्तर प्रदेश में नाम- काम का सिक्का जमाने वाले इस सुपर कॉप का नाम है अमिताभ यश। चर्चित फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया अमिताभ यश पर फिल्म बना रहे जिसमें शाहरुख खान सुपर कॉप की भूमिका में होंगे। अमिताभ यश 1996 बैच के आइपीएस हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश में एसटीएफ आइजी के पद पर तैनात हैं। उन्होंने चंबल के कुख्यात डकैत ददुआ के सफाये के लिए अदम्य साहस और बुद्धिमानी का परिचय दिया था। इस ऑपरेशन को ही फिल्म में रोमांचक तरीके से दिखाया जाने वाला है।

बिहार के हैं अमिताभ यश
अमिताभ यश बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता रामयश सिंह पटना में रहते थे। अमिताभ ने पटना के सेंट माइकल स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। फिर वे इंटर की पढ़ाई के लिए डीपीएस, आरकेपुरम, दिल्ली गये। इंटर के बाद उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज, सेंट स्टीफंस में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने केमेस्ट्री में बीएससी ऑनर्स किया। फिर उन्होंने आइआइटी कानपुर से केमिस्ट्री में एमएससी किया। अमिताभ यश बचपन से ही पढ़ने में तेज थे। 1996 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ। वे उत्तर प्रदेश कैडर के आइपीएस अफसर बने।

आतंक का दूसरा नाम था ददुआ।
ददुआ यानी शिव कुमार पटेल खूंखार डाकू था। उस पर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने पांच लाख तो मध्य प्रदेश की पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। 22 साल की उम्र में ही 8 लोगों की हत्या कर वह बीहड़ों में उतर गया था। 1982 में वह डकैतों का सरदार बन गया था। बांदा, चित्रकूट समेत बुंदेलखंड में उसकी इजाजत के बिना पत्ता नहीं डोलता था। डकैती और रंगदारी के लिए उसने करीब दो सौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। उसका आतंक मध्य प्रदेश के बीहड़ों तक फैला हुआ था। 2007 में उत्तर प्रदेश सरकार ने ददुआ के खात्मे की जिम्मेवारी एसटीएफ को सौंपी। उस समय एसटीएफ के एसपी अमिताभ यश थे। तब तक यश एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की छवि बना चुके थे। अप्रैल 2007 में यश ने ददुआ के लोकेशन को ट्रेस करन के लिए अपने मुखबिरों की सक्रिय किया। पान की दुकान और फेरवालों को मुफ्त मोबाइल बांट कर नया खबरी बनाया गया। ऑपरेशन ददुआ इतना गोपनीय था कि इसकी लोकल पुलिस को भनक तक नहीं लगी।

रोमांचक हैं अमिताभ यश के कारनामे
तकरीबन तीन महीने के बाद ददुआ के दाहिने हाथ छोटा पटेल का लोकेशन ट्रेस हुआ। इसके बाद अमिताभ यश अपनी टीम के साथ जंगलों में उतर गये। एसटीएफ और छोटा पटेल के बीच रूक-रूक कर गोलीबारी होती रही। दिन ढलने के करीब था। गोलीबारी रुक नहीं रही थी। भयंकर गर्मी और उमस में एसटीएफ के पास पानी खत्म हो गया था। लेकिन जांबाज जवानों ने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार छोटा पटेल मारा गया। 22 जुलाई 2007 को इनपुट मिला कि ददुआ चित्रकूट के झलमल जंगलों में डेरा डाले हुए है। एसटीएफ के एसपी अमिताभ यश, एएसपी अनंत देव, इंसपेक्टर अनिल सिंह, विमल सिंह और 24 कमाडों की टीम जंगल में कूच कर गयी। जंगल में करीब 50 किलोमीटर अंदर दाखिल होने के बाद ददुआ की टोह मिली। रात भर खाक छानने के बाद सुबह के आठ बज चुके थे। ददुआ गैंग को देखते ही एसटीएफ ने फायरिंग शुरू कर दी। करीब एक घंटे की मुठभेड़ के बाद आतंक का पर्याय दुदआ मारा गया।

राजनीति और अपराध की खौफनाक कहानी
खूंखार डकैत ददुआ राजनीति में भी दिलचस्पी लेने लगा था। चित्रकूट, बांदा इलाके में इसकी इजाजत के बिना कोई चुनाव नहीं लड़ सकता था। उत्तर प्रदेश- मध्य प्रदेश की 15 विधानसभा सीटों और 10 लोकसभा सीटों पर ददुआ का हुकुम चलता था। उसने विधायक चुनाव के लिए पांच करोड़ और सांसद चुनाव के लिए 10 करोड़ रंगदारी तय कर रखी थी। शुरू में उसका झुकाव बसपा की तरफ था। वह जिसको कहता उसे बसपा से टिकट मिल जाता था। लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में ददुआ ने अपनी स्वामीभक्ति बदल दी और सपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी। उसकी यही गलती मौत का कारण बन गयी। 2004 में ददुआ ने बांदा के बसपा सांसद और अपने गुरु रामसंजीवन को हरवा दिया था। ददुआ का परिवार सपा में शामिल हो गया। 2004 में ददुआ के फरमान से सपा के श्यामाचरण गुप्ता को जीत मिली। इसके बाद कहा जाने लगा कि जैसे ही लखनऊ में सरकार बदलेगी, वैसे ही ददुआ का खात्मा हो जाएगा।

2007 में ददुआ ने फिर बसपा का विरोध किया
2007 के विधानसभा चुनाव में ददुआ ने फिर बसपा को हराने का फरमान जारी किया। बसपा मैं उसके सम्पर्क सूत्रों ने बहुत समझाया, वेकिन वह माना नहीं। इस चुनाव में बुंदेलखंड से बसपा के सिर्फ दद्दू प्रसाद ही जीत पाये। बसपा को बहुत नुकसान हुआ। बुंदेलखंड में बसपा को नुकसान तो हुआ लेकिन पूरे राज्य में उसे व्यापक जनसमर्थन मिला। उसने पूर्णबहुमत हासिल कर सरकार बनायी। मुलायम सरकार की हार हुई। 2007 में जब मायावती की सरकार बनी तो सियासी अदावत साधने का मौका मिल गया। सरकार के निर्देश पर तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह ने तेज तर्रार आपीएस अमिताभ यश को ददुआ को ठिकाने लगाने का जिम्मा सौंपा था। कभी मायावती के सहयोगी रहे केके गौतम ने आरोप लगाया था कि मायावती के इशारे पर ही पुलिस ने ददुआ को मार गिराया था। राजनीतिक संरक्षण के कारण ही ददुआ तीस साल तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। लेकिन जैसे ही सियासी सरपरस्ती खत्म हुई, वह मारा गया। बाद में ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल मिर्जापुर से सांसद (सपा) और पुत्र वीर कुमार पटेल चित्रकूट से विधायक हुए।












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