यौन शोषण के आरोपी जस्टिस गांगुली के लेकर भिड़ें स्वामी-स्वराज

जहां सुषमा स्वराज ने गांगुली से पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा है वहीं मंगलवार को सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर और मीडिया के सामने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर गांगुली से इस्तीफे की मांग करना बेकार है।
जिसके बाद पार्टी के अंदर के मतभेद खुलकर लोगों के सामने आ गये हैं। गांगुली के इस्तीफे की मांग केवल सुषमा स्वराज ने ही नहीं की है बल्कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी की थी।
सुषमा स्वराज पर कोई टिप्पणी ना करते हुए सुब्रमणय्म स्वामी ने अपनी बात कहते हुए कहा कि केवल आरोपों के आधार पर अगर गांगुली का इस्तीफा मांगा जा रहा है तो सरकार के खिलाफ फैसला देने वाला हर जज को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
गौरतलब है कि देश के सर्वोच्च अदालत के रिटायर्ड जज ए.के. गांगुली पर महिला इंटर्न ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले की जांच कर रही समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में जस्टिस गांगुली का नाम उजागर किया था। जिसके बाद जस्टिस गांगुली मे बयान देते हुए कहा कि मैं पूरी तरह से बेकसूर हूं और मेरा नाम इस घृणित अपराध में खींचना सरासर गलत औऱ बेबुनियाद है। मेरे साथ गलत हो रहा है।
आपको बता दें कि इस जज पर केवल इंटर्न ने ही बल्कि एक महिला ने भी यौन शोषण का आरोप लगाया था। उसके बाद इंटर्न ने यौन शोषण का आरोप लगाया। लीगली इंडिया वेबसाइट की रिपोर्ट को माने तो इंटर्र ने फेसबुक पर अपनी दर्द भरी दास्तां को व्यक्त किया था लेकिन इंटर्न की इस दुखद व्यथा को हो-हल्ला मचने के बाद हटा लिया गया है। इंटर्न कोलकाता के प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज एनयूजेएस की छात्रा है और उसने फेसबुक पर लिखा था कि उसे जज के हाथों एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार यौन-शोषण का शिकार होना पड़ा है। हालांकि इंटर्न ने यह भी लिखा है कि उसने जज के सामने जब यौन शोषण का विरोध किया तो जज ने उससे वादा किया था कि वह आगे से ऐसा नहीं करेंगे लेकिन हाल ही में जब महिला ने जज पर यौन शोषण का आरोप लगाया तो उसका दुख सामने आ गया।












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