पुलवामा में शहीद रोहतक के सिपाही संदीप सिंह, दो साल पहले हुई थी शादी
रोहतक। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के गांव डालीपोरा में हुए एनकाउंटर सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को ढेर कर दिया। मारे गए आतंकियों में जैश का कमांडर खालिद भी ढेर कर दिया गया है। एनकाउंटर में सेना के जवान सिपाही संदीप सिंह भी शहीद हो गए। शहीद संदीप हरियाणा के रोहतक के रहने वाले थे। उनकी शहादत की खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम फैल गया और उनके परिवार वालों को सांत्वना देने के लिए घर पर भीड़ इकट्ठा होने लगी।

घर लोगों का हुजूम
संदीप, रोहतक के बेहल्बा गांव के रहने वाले थे। अप्रैल 2017 यानी दो साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। संदीप के दो और भाई हैं लेकिन बचपन से उन्हें सेना में जाने की ललक थी। इस वजह से उन्होंने आर्मी को चुना। तीन भाइयों में संदीप आर्मी में भर्ती हो गए थे। बताया जा रहा है कि उनका पार्थिव शरीर आज शाम तक उनके गांव पहुंच जाएगा। उनके घर पर भारी भीड़ है। लोग कभी उनके माता-पिता को सांत्वना देते तो कभी उनकी पत्नी को समझाते। प्रशासनिक अधिकारी भी उनके घर पर पहुंचे हैं।

घर में छिपे थे आतंकी
जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि एनकाउंटर में जिन तीन आतंकियों को मारा गया है उसमें से एक साल 2017 में हुए लेतपोरा हमले में शामिल था। दिसंबर 2017 को सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए थे। गुरुवार तड़के डालीपोरा गांव के एक घर में कुछ आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीम ने घर को घेर लिया। आतंकियों की ओर से सुरक्षाबलों पर फायरिंग की गई और सुरक्षाबलों की तरफ से इसका जवाब दिया गया।

मारा गया एक आतंकी पाकिस्तान का
इसके बाद एनकाउंटर शुरू हो गया। पुलिस की ओर से कहा गया है एनकाउंटर में एक आम नागरिक भी मौत हुई है जो दोनों तरफ से हो रही फायरिंग की चपेट में आ गया है। पुलिस ने बताया है कि तीन आतंकियों में से एक आतंकी खालिद पाकिस्तानी का था। बाकी दोनों आतंकियों में से एक नसीर पंडित पुलवामा का रहने वाला था और उमर मीर शोपियां का रहने वाला था। पुलिस की ओर से कहा गया है कि तीनों पिछले कुछ वर्षों से जैश के साथ जुड़े थे। एनकाउंटर के बीच ही पुलवामा में भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव किया। इसकी वजह से यहां पर कर्फ्यू लगा दिया गया ओर इंटरनेट सर्विसेज को भी ठप कर दिया गया।

पुलवामा में ही हुआ था हमला
श्रीनगर में भी मोबाइल इंटरनेट की स्पीड को भी कम कर दिया गया है ताकि लोग भड़काऊ मैसेज और तस्वीरें शेयर न कर सकें। पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले को जैश ने ही अंजाम दिया था और इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। उस समय से ही सुरक्षाबल पुलवामा की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।












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