जिस सहकर्मी ने 'बदबू' फैलाने से किया मना, वकील ने उसी पर ठोक दिया केस, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

लंदन, 23 दिसंबर: इंग्लैंड के क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस(सीपीएस) पर मुकदमा करने वाले सीनियर बैरिस्टर अपना वह केस हार गए हैं। जिसमें बैरिस्टर ने कोर्ट में यह कहकर मुकदमा किया था उसे ऑफिस रूम उसके सहकर्मी द्वारा पादने से रोका गया है। सीनियर बैरिस्टर तारिक मोहम्मद ने उत्पीड़न के लिए मुकदमा दायर किया था। उन्होंने रोजगार न्यायाधिकरण को बताया कि उनका बार-बार गैस उस दवा के कारण था जो वह हार्ट कंडीशन के लिए ले रहे थे।

दवाई के साइड इफेक्ट चलते शख्स का बार बार फूलता था पेट

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तारिक मोहम्मद ने कहा कि उनके सहयोगी पॉल मैकगॉरी की टिप्पणी "शर्मनाक" थी और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला था। लेकिन पैनल ने पाया कि यह एक उचित अनुरोध था कि उन्हें ऐसा आग्रह के तौर कर रोकने के लिए कहा गया था। अभियोजक को 2014 में दिल का दौरा पड़ा चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी अक्षमताओं के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया । उन्होंने अपने सहकर्मियों और मालिकों के खिलाफ कई और आरोप लगाए।

शख्स ने अपने साथ लगाए दुर्व्यवहार के आरोप

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तारिक मोहम्मद ने दावा किया कि उनके सहकर्मियों ने उनकी पानी की बोतलें फेंक दीं। मुझे सप्ताह में एक दिन 60 मील दूर काम करने के लिए कहा गया और जब वह बीमार की छुट्टी पर थे तो उन्हें बैरिस्टर अभ्यास प्रमाण पत्र के लिए भुगतान नहीं किया गया। हालांकि, बर्कशायर में रोजगार न्यायाधीश एम्मा हॉक्सवर्थ की अध्यक्षता वाले पैनल ने विकलांगता से संबंधित भेदभाव के दावों को भी खारिज कर दिया।

सीपीएस ने स्वीकार की भेदभाव की बात

सीपीएस ने स्वीकार की भेदभाव की बात

वहीं सीपीएस ने स्वीकार किया कि उसने मोहम्मद को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति नहीं दी और उसकी मेडिकल कंडिशन को देखते हुए इसे मैनेज करने में मदद करने के लिए शाम 4 बजे काम छोड़ कर जाने की अनुमति दी थी। यही नहीं उन्हें अदालती कर्तव्यों से हटाया गया है, जिसका अर्थ है कि उन्हें मुआवजा मिलेगा। उनके दिल की स्थिति का मतलब था कि उन्हें रोजाना दवा लेनी पड़ती थी, जिसके साइड-इफेक्ट्स का मतलब था कि इसे लेने के बाद उन्हें कई घंटों तक घर पर रहना पड़ता था।

जज ने दलीले सुन दिया ये फैसला

जज ने दलीले सुन दिया ये फैसला

2016 में उन्होंने मैकगॉरी के साथ ऑफिश शेयर करना शुरू किया, जहां उनके लगातार पेट फूलने का मुद्दा उठाया था। ट्रिब्यूनल को बताया गया कि, मैकगॉरी को पता था कि तारिक को दिल का दौरा पड़ा था, लेकिन उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि तारिक कोई ऐसी दवा ले रहे हैं जिसके साइड इफेक्ट के चलते वे बार बार गैस छोड़ते थे। एक बार मैकगॉरी ने तारिक से पूछा था कि आपने किया है तारिक? मोहम्मद ने कहा कि यह उनकी दवा के कारण था। इस पर उनके सहयोगी ने उन्हें पादने के लिए बाहर जाने के लिए कहा था।

न्यायाधीश एम्मा हॉक्सवर्थ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि मोहम्मद से सवाल "[उनकी] गरिमा का उल्लंघन करने या ऐसा माहौल बनाने के उद्देश्य से नहीं पूछे गए थे। यह पूछा जाना कई अनुचित नहीं है, जब एक छोटे से कार्यालय में बार-बार पेट फूलने की घटनाएं होती हों।

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