सिर्फ सरकार की आलोचना करने की वजह किसी पर थोपा नहीं जा सकता राष्ट्रद्रोह और मानहानि का मामला

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सिर्फ सरकार की आलोचना करने मात्र से किसी पर देशद्रोह या मानहानि के मामले नहीं थोपा जा सकता।

supreme court of india

न्यायाधीश दीपक मिश्र और न्यायाधीश यू.यू. ललित की बेंच ने इस मामले पर और कुछ कहने से दूरी बनाते हए कहा कि कोई सरकार की आलोचना करने के लिए बयान दे रहा है तो सरकार उस पर मानहानि और देशद्रोह के मामले नहीं थोप सकती।

कुछ दिशानिर्देशों का करना होगा पालन

हमने इसे स्पष्ट किया है कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 124 ए देशद्रोह को लागू करने से रहले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार कुछ दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ ) की ओर से अदालत में मौजूद वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राष्ट्रद्रोह एक गंभीर मामला है और इस कानून का दुरूपयोग किया जा रहा है।

हमें व्याख्या नहीं करनी

उन्होंने कुडानकुलम परमाणु परियोजना का विरोध कर रहे लोगों पर और कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के खिलाफ लगाए गए राष्ट्रद्रोह के मामलों का उदाहरण दिया।

सोमवार (5 सितंबर) को एनजीओ कॉमन कॉज की याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने इस संबंध में निर्देश देने से इंकार किया कि इस आदेश की प्रति राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को भेजा जाए।

प्रशांत भूषण द्वारा मामलों का उदाहरण दिए जाने पर पीठ ने कहा कि 'हमें राष्ट्रद्रोह के कानून की व्याख्या नहीं करनी है। यह सन् 1962 में केदारनाथ सिंह बनाम बिहार सरकार मामले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ क फैसले सेस्पष्ट है।'

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+