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दिल्ली-एनसीआर में Pollution वैज्ञानिकों को भी ऐसे दे रहा है चकमा

नई दिल्ली- अबतक वैज्ञानिकों की ओर से बताया जा रहा था कि दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक स्तर से प्रदूषण के घटने के लिए बारिश होने या तेज हवा का चलना जरूरी है। रविवार को जब दिल्ली-एनसीआर के लोग सुबह-सुबह छठ पूजा के लिए उठे तो उन्होंने बारिश की हल्की फुहारें होती देखीं। लोगों में उम्मीद जग गई कि अब प्रदूषण का स्तर जरूर घट जाएगा। लेकिन, इसका उल्टा हुआ है और तड़के बूंदा-बांदी होने के बावजूद प्रदूषण के स्तर में और इजाफा महसूस किया जा रहा है। यही नहीं प्रदूषण में हुए इजाफे और बादलों की वजह से ऐसे हालात बन गए कि श्रद्धालु सुबह के अर्घ्य के दौरान सूर्य देवता का दर्शन भी नहीं कर सके। अब वैज्ञानिक भी इस स्थिति से चक्कर खा रहे हैं कि आखिर बारिश होने और तेज हवा के चलने के बावजूद इसका विपरीत असर क्यों पड़ रहा है।

सुबह की बारिश के बाद और बढ़ गया प्रदूषण

सुबह की बारिश के बाद और बढ़ गया प्रदूषण

शनिवार शाम और रविवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में हुई हल्की हारिश बारिश के बावजूद हवा की गुणवत्ता का स्तर और खराब हो गया। दिल्ली में शनिवार शाम को कुल मिलाकर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) जो 447 दर्ज किया गया था, रविवार सुबह वह बढ़कर 486 तक पहुंच गया। दिल्ली के अधिकतर इलाकों में हवा की स्वच्छता का स्तर बहुत खराब है और आईटीओ इलाके में तो सुबहम में यह 486 के स्तर पर पहुंच गया। सबसे बड़ी बात ये है कि शनिवार से हवा भी चल रही है लेकिन प्रदूषण का स्तर उल्टे बढ़ ही गया है। रविवार को सुबह में दिल्ली-एनसीआर के सभी प्रदूषण मापने वाले केंद्रों में हवा की गुणबत्ता बहुत ही खराब स्तर पर दर्ज की गई है।

बारिश से बढ़ा प्रदूषण, वैज्ञानिक हैरान

बारिश से बढ़ा प्रदूषण, वैज्ञानिक हैरान

पर्यावण वैज्ञानिक इस बात से हैरान हैं कि तेज हवा चलने और बारिश की हल्की फुहारों के बाद प्रदूषण का जो स्तर घटना चाहिए, वह बढ़ क्यों गया? कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि रविवार को जो बारिश हुई वह इतनी पर्याप्त नहीं हुई कि उससे प्रदूषण पर असर पड़े, बल्कि नमी बढ़ने से पॉल्युटैंट पार्टिकल्स को ज्यादा केंद्रित होने में मदद मिली है। इसकी वजह ये भी है कि हरियाणा और पंजाब की ओर से आने वाली हवा अपने साथ पराली जलने से पैदा हुई प्रदूषित कणों को भी तेजी से बहा कर ला रही हैं। जानकारों को लगता है कि यही वजह है कि रविवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ गई और विजिबिलिटी भी घटकर बहुत कम रह गई। पर्यावण के जानकारों को उम्मीद है कि सोमवार से इस स्थिति में थोड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

क्या कहते हैं प्रदूषण के मानक?

दो दिन पहले ही प्रदूषण की बेहद खराब स्थिति के चलते राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्री में हेल्थ- इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी थी और स्कूलों को बंद करने की घोषणा भी की गई थी। रविवार को सुबह दिल्ली के आनंद विहार इलाके में एक्यूआई 478 और अलीपुर में 463 दर्ज किया गया। जबकि, ज्यादातर इलाकों में यह 450 एक्यूआई से ऊपर ही देखा गया। बता दें कि जब एक्यूआई 0-50 के बीच होता है तो उसे 'अच्छा', 51-100 को 'संतोषजनक', 101-200 को 'मध्यम', 201-300 को 'खराब', 301-400 को 'बहुत खराब' और 401-500 को 'गंभीर' और उससे ज्यादा को 'बहुत ज्यादा गंभीर' की श्रेणी में माना जाता है।

अबतक हुई कार्रवाई

अबतक हुई कार्रवाई

सरकारी एयर क्वालिटी मॉनिटर SAFAR ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में पराली से प्रदूषण का जो स्तर शुक्रवार को 44 फीसदी था (सीजन का सबसे ज्यादा), वह शनिवार को घटकर सिर्फ 17 फीसदी रह गया। गौरतलब है कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में चलने वाले पैनल ने प्रदूषण के खतरनाक स्थिति के मद्देनजर दिल्ली-एनसीआर में हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी थी और 5 नवंबर तक सभी तरह के कंस्ट्रक्शन पर रोक लगा दी थी। इस बीच शनिवार को दिल्ली के पास नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पाबंदी के बावजूद कंस्ट्रक्शन जारी रखने के लिए 38 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें रियल एस्टेट ग्रुप का एक डायरेक्टर और तीन इंजीनियर भी शामिल हैं।

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