आज भी राजौरी के ज्यादातर स्कूलों में नहीं होता राष्ट्रगान
राजौरी। जम्मू कश्मीर का जिला राजौरी सीमावर्ती इलाका है जहां कभी आतंकियों का गढ़ हुआ करता था। राजौरी और पूंछ दोनों जिलो में आतंकी वारदातें आज भी होती है। आज भी आतंकियो के डर की वजह से राजौरी के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों भारत का राष्ट्रगान नहीं गाया जाता था। आज आतंकी वारदातें बहुत कम हो चुकी है और आज भी स्कूलों में राष्ट्रगान नहीं गाया जाता है।

इस पर हुए डाईट प्रिंसिपल प्रदीप शर्मा ने बताया की कभी यहां पर आतंकी वारदातों की वजह से राष्ट्रगान स्कूलों में नहीं होता था लेकिन आज राजौरी में शांति का माहौल है। उन्होंने बताया की आज भी काफी स्कूल हैं जहा राष्ट्रगान नहीं गाया जाता।
उन्होंने जानकारी दी कि राष्ट्रगान को नहीं गाना इसका अपमान करना है और अब डाईट की तरफ से एक लेटर निकाला जाएगा। इसके तहत सभी स्कूलों को आदेश दिया जाएगा। जिन स्कूलों में राष्ट्रगान नहीं होगा उसके खलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजौरी के उपजिला अध्यक्ष, ए डी सी मुताज अली के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों से राजौरी में आतंकी वारदातों की वजह से राष्ट्रगान नहीं गाया जाता था और जाता था पर अब स्कूलों पर नजर रखी जाएगी। सभी स्कूलों को आदेश दिए जाएंगें कि स्कूलों में राष्ट्रगान को गाया जाए।
15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ तब दुनिया के दूसरे आजाद मुल्कों की तरह भारत के पास अपना राष्ट्रगान नहीं था। तब जिस गीत ने आजादी के जश्न को मुकम्मल किया था वह वंदे मातरम था।












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