न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ को तत्काल रिहा करने का आदेश, गिरफ्तारी को SC ने बताया अवैध
न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ को यूएपीए केस में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी और इसके बाद उनको रिमांड में लिया जाना अवैध है।
जस्टिस बीआर गवी और जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा हिरासत आवेदन पर फैसला लेने से पहले प्रबीर पुरकायस्थ और उनके वकील को इसका आधार नहीं बताया गया।

कोर्ट ने वकील से पूछा कि आपने जब शाम को उन्हें गिरफ्तार किया तो आपके पास वकील को सूचित करने का पूरा समय था। सुबह 6 बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की क्या जल्दबाजी थी।
बता दें कि पुलिस ने इस मामले में 8000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। दिल्ली पुलिस ने पुरकायस्थ को टेरर फंडिंग करने और चीनी प्रोपेगेंडो को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया । पुलिस ने न्यूजक्लिक के हेड एचआर अमित चक्रवर्ती को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि उन्होंने सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी थी।
हालांकि इस केस में चार्जशीट फाइल हो चुकी है, जिसे दिल्ली पुलिस ने फाइल किया है,ऐसे में कोर्ट ने प्रबीर की जमानत को ट्रायल कोर्ट के आदेश के अनुसार सशर्त रखने का निर्देश दिया है।
गिरफ्तारी के समय इसकी वजह नहीं बताने की वजह से कोर्ट ने इसे अवैध करार देते हुए इसे निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा तय की गई मुचलके की राशि को जमा करने के बाद प्रबीर को रिहा किया जा सकता है।
पुरकायस्थ के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि जब उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया गया तो उनको इसका आधार नहीं बताया गया। जबकि गिरफ्तारी के वक्त इसकी लिखित जानकारी देना होता है। यूएपीए के तहत गिरफ्तारी की वजह लिखित में देना अनिवार्य नहीं है।
दिल्ली पुलिस की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि पुरकायस्थ को उनकी गिरफ्तारी की वजह बताई गई थी। वकील अर्शदीप खुराना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रबीर की गिरफ्तारी और रिमांड को अवैध माना है और उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।












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