इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर मांगी गई जानकारी का SBI ने नहीं दिया जवाब, RTI के जवाब में क्या बताया?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकार लगाए जाने के कुछ सप्ताह बाद, चुनावी बॉन्ड पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने आरटीआई के तहत पूछे गए एक सवाल का जवाब देने इनकार कर दिया है। दरअसल सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत एक दायर याचिका में भारतीय स्टेट बैंक से उन दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी मांगी गई थी जो उसने इलेक्टोरल बॉन्ड बेचने और उसे भुनाने को लेकर अपनी शाखाओं को जारी किए थे।
द इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RTI एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने याचिका दायर की थी। इसमें सूचना का अधिकार के तहत इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के लिए बैंक द्वारा निर्धारित एसओपी के बारे में जानकारी मांगी गई थी।

एसबीआई के डिप्टी जनरल मैनेजर एम कन्ना बाबू द्वारा 30 मार्च को दिए गए जवाब में बैंक ने कहा है कि एसओपी आंतरिक दिशानिर्देश थे और उनसे संबंधित जानकारी को आरटीआई कानून की धारा 8(1)(डी) के तहत जारी करने से छूट दी गई है। हालांकि याचिकाकर्ता ने एक बयान में कहा है कि बैंक द्वारा जानकारी देने से इनकार करने के फैसले को अपील में चुनौती दी जाएगी।
फरवरी में चुनावी बांड योजना को रद्द करने वाले ऐतिहासिक फैसले के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी को यह जानने का पूरा हक है कि राजनीतिक पार्टियों को कहां से चंदा मिल रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने एसबीआई को चुनावी बॉन्ड का डाटा सार्वजनिक करने और चुनाव आयोग को देने का निर्देश दिया था।
बैंक ने डेटा साझा करने के लिए तीन महीने का समय मांगा था। हालांकि, अदालत ने उसके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और उससे दो दिनों के भीतर डेटा सार्वजनिक करने को कहा। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उसने जल्द से जल्द डेटा का खुलासा नहीं किया तो वह बैंक के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगी।
इसके बाद बैंक ने चुनाव आयोग से अपना डेटा साझा किया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने 14 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक किया था। चुनाव आयोग ने सारा डेटा दो सेट में अपलोड किए थे। पहली लिस्ट में कंपनियों की ओर से खरीदे गए बॉन्ड की जानकारी थी और दूसरी लिस्ट में राजनीतिक पार्टियों की ओर से बॉन्ड भुनाने वाली जमा राशि की जिक्र था।
बैंक द्वारा डेटा शेयर करने के तुरंत बाद, एक बार फिर से एसबीआई को अदालत की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। अदालत ने पूछा कि बैंक ने बांड संख्या का खुलासा क्यों नहीं किया। इसके बाद, बैंक ने अन्य डिटेल शेयर की और एक हलफनामा दायर कर कहा कि उसने पोल बांड योजना से संबंधित सभी जानकारी का खुलासा कर दिया है।












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