भगवान शिव के साथ PM मोदी की प्रतिमा को कांधे पर बिठाए नजर आए कांवड़िए, हर की पौड़ी में कराया स्नान
Sawan 2024: सावन का महीना चल रहा है और लोग शिव जी को जल चढ़ाने दूर-दूर से कांवड़ लेकर भोलेबाबा को जल चढ़ाने जा रहे हैं। हर साल कांवड़ यात्रा में कुछ ना कुछ अनोखा देखने को मिलता है। कंधे पर कांवड़ लिए जल चढ़ाने तो हजारों लोग जाते हैं लेकिन इस बार कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला है।
जी हां, इस बार कांवड़ यात्रा में एक श्रद्धालु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मूर्ति को कंधे पर बिठा कर जल चढ़ाने जाता दिखा। वहीं, दूसरे कांवड़िए ने कांधे पर भगवान शिव की मूर्ति को बिठा रखा था।

हालांकि, भोले बाबा की मूर्ति को कंधे पर बिठाए हर साल कुछ कांवड़िए दिख जाते हैं लेकिन इस बार का नजारा लगा है। शायद ये पहली बार है जब कोई कांवड़िया कांधे पर पीएम मोदी की मूर्ति बिठाए दिखाई दिया है।
ये नजारा देखने को मिला हरिद्वार में जहां बागपत के रूपेंद्र तोमर और सोनू त्यागी प्रधान मंत्री मोदी और भगवान शिव की मूर्तियों को अनुष्ठान स्नान के लिए हर की पौड़ी ले गए हैं।
— Sunidhi (@sunidhi_here) July 29, 2024
क्या होती है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यात्रा एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थयात्रा है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है। भगवान शिव के भक्त, जिन्हें "कांवड़िए" के नाम से जाना जाता है, गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों से जल इकट्ठा करने के लिए पैदल चलते हैं। यह जल फिर शिव मंदिरों में चढ़ाया जाता है।
सावन (जुलाई-अगस्त) के महीने में होने वाली इस यात्रा के दौरान भक्त नारंगी रंग के कपड़े पहनते हैं और अपने कंधों पर कांवड़ नामक बांस की छड़ी रखते हैं। इस छड़ी के दोनों सिरों से पवित्र जल से भरे बर्तन लटकते हैं। यह यात्रा कई दिनों तक चलती है और लंबी दूरी तय करती है, जो भक्ति और धीरज का प्रतीक है।
सावन के दौरान शिव भक्त बड़ी संख्या में इस तीर्थयात्रा पर आते हैं। वे हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज और वाराणसी जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से जल इकट्ठा करते हैं। वापस लौटने पर इस एकत्र किए गए जल को स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाया जाता है।
कांवड़ यात्रा का महत्व
कांवड़ यात्रा शिव के भक्तों के बीच समर्पण और आध्यात्मिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कांवड़ लेकर लंबी दूरी तक पैदल चलने का कार्य उनकी अटूट भक्ति को दर्शाता है। यह यात्रा सिर्फ़ एक भौतिक यात्रा नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा भी है जो उनकी आस्था को मज़बूत करती है।
इस तीर्थयात्रा की गहरी सांस्कृतिक जड़ें हैं और यह कई हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण परंपरा बनी हुई है। यह भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति से विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ लाता है।
यह यात्रा हिंदू धर्म में पवित्र नदियों के महत्व को भी उजागर करती है। इन नदियों से जल एकत्र करके, भक्तों का मानना है कि वे अपने समुदायों में दिव्य आशीर्वाद वापस ला रहे हैं।
कुल मिलाकर, कांवड़ यात्रा हिंदू संस्कृति में आस्था और परंपरा की स्थायी शक्ति का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि भक्त अपने देवताओं का सम्मान करने और अपनी धार्मिक प्रथाओं को बनाए रखने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।












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