'बप्पा' के साथ सारा अली खान ने शेयर की तस्वीर लेकिन भड़क गए लोग, हुईं बुरी तरह से ट्रोल, जानिए क्यों?
मुंबई। देश में इस वक्त गणेशोत्सव चल रहा है, कोरोना महामारी की वजह से इस बार गणेश उत्सव को धूम-धाम से नहीं मनाया जा रहा है लेकिन भक्तगण अपने-अपने हिसाब से अपने घरों में बप्पा की पूजा कर रहे हैं, बहुत सारे फिल्मी सितारों की वो तस्वीरें इस वक्त सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जो कि उन्होंने गणपति के साथ या उनकी पूजा करते हुए शेयर की है लेकिन फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान की तस्वीर सामने आने पर यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं और उन पर खराब और गंदे कमेंट कर रहे हैं।

धर्म की वजह से ट्रोल हो रही हैं सारा अली खान
दरअसल सारा अली खान को उनके धर्म और नाम को लेकर काफी बुरी तरह से ट्रोल किया जा रहा है। ट्रोल हो रही तस्वीर में सारा गणपति के मूर्ति के सामने खड़ी हैं और गुलाबी रंग की पारंपरिक ड्रेस में बहुत सुंदर भी लग रही हैं लेकिन हेटर्स को ये बात अच्छी नहीं लगी और वो उनके धर्म और माता-पिता को लेकर कमेंट कर रहे हैं और सारा को ट्रोल कर रहे हैं, मालूम हो कि सारा अली खान अभिनेता सैफ अली खान और अभिनेत्री अमृता सिंह की बेटी हैं।

सारा के पिता मुस्लिम और मां हिंदू हैं इसलिए भड़के लोग
सैफ मुस्लिम हैं और अमृता हिंदू हैं, हालांकि सैफ से शादी करने के लिए अमृता ने इस्लाम अपनाया था, वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है, जब सारा को इस तरह से ट्रोल किया जा रहा है , वो इससे पहले भी इस बात को लेकर कुछ कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार हो चुकी हैं।

पहले भी धर्म के नाम पर हुई थीं ट्रोल
मालूम हो कि सारा अली खान इसी साल मार्च महीने में फिल्म 'अतरंगी रे' की शूटिंग के लिए धार्मिक नगरी काशी में थीं, उस दौरान वो काशी की घाटों, गंगा आरती और बनारस की गलियों में घूमते भी दिखाई पड़ी थीं,उस वक्त सारा अली खान का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ था जिसमें एक्ट्रेस सारा अली खान काशी के प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर की गली से रिपोर्टिंग करती दिखाई पड़ी थीं लेकिन उनको लेकर वहां पर एक विवाद पैदा हो गया था।

'गैर-हिंदुओं' का प्रवेश प्रतिबंधित हैं
दरअसल सारा अली खान द्वारा बनारस में मंदिरों के दर्शन करने पर समिति के महासचिव चंद्र शेखर कपूर ने कहा था कि मंदिर में सारा का आना परंपराओं और स्थापित मानदंडों के खिलाफ है इससे मंदिर की सुरक्षा पर भी सवाल उठता है,जहां लगे साइन बोर्ड पर यह स्पष्ट तौर पर लिखा हुआ है कि मंदिर में 'गैर-हिंदुओं' का प्रवेश प्रतिबंधित हैं, वो तो मुस्लिम हैं, ऐसे में वो मंदिर कैसे जा सकती हैं।
स्थानीय पुजारी बोले- वह मुसलमान हैं
तो वहां के स्थानीय पूजारी ने कहा था कि यद्यपि हिंदू धर्म में उनकी रुचि की हम सराहना करते हैं, लेकिन बात यह है कि वह मुसलमान हैं और धार्मिक संस्कारों में उन्हें भाग नहीं लेना चाहिए था. उनके लिए यह सब कुछ बेहद 'रोमांचक और मजेदार' होगा, लेकिन हमारे लिए यह धार्मिकता का मामला है।
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