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संजय राउत तो गए, ED के रडार पर हैं ये बड़े नेता भी, कभी भी कस सकता है शिकंजा

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नई दिल्ली, 1 अगस्त: शिवसेना सांसद संजय राउत की मुश्किलें बढ़ चुकी हैं। वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ईडी की गिरफ्त में हैं। उनके नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस समय उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। जिसकी वजह से पार्टी के कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में डटे हुए हैं। संजय राउत का आगे का भविष्य क्या होने वाला है, इसपर कुछ भी कहना अभी बहुत ही जल्दबाजी है। लेकिन, प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर कई और बड़े नेता भी हैं। कुछ तो अभी भी सलाखों के पीछे पड़े हुए हैं और कुछ के दिन कभी भी राउत की तरह बदल सकते हैं। आइए उन तमाम नेताओं के बारे में जानते हैं।

ईडी की गिरफ्त में संजय राउत

ईडी की गिरफ्त में संजय राउत

रविवार को प्रवर्तन निदेशालय ने जो कार्रवाई की है, उससे पिछले ढाई वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति में हाई प्रोफाइल बने रहे शिवसेना सांसद संजय राउत की आगे की राह मुश्किल हो चुकी है। उन्होंने ईडी के कई समन को नजरअंदाज किया, नतीजा ये हुआ कि रविवार को सुबह एजेंसी के अधिकारी उनके घर पहुंच गए और मनी लॉन्ड्रिंग के केस में देर रात तक जाते-जाते उन्गें गिरफ्तार कर लिया। जहां तक राउत या उनकी पार्टी शिवसेना और उसके नेता उद्धव ठाकरे का सवाल है तो वो ईडी की कार्रवाई को केंद्र की ओर से बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई बता रहे हैं। कांग्रेस और टीएमसी जैसी विपक्षी पार्टियां भी इस मामले में उनके साथ हैं, जो पहले से ईडी पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, विपक्ष के दावों और आपत्तियों की हवा सुप्रीम कोर्ट ही निकाल चुका है।

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    राउत के अलावा और नेता भी हैं ईडी के रडार पर

    राउत के अलावा और नेता भी हैं ईडी के रडार पर

    शिवसेना नेता को प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई के पात्रा चॉल जमीन घोटाले से जुड़े मामले में पकड़ा है। इस मामले में उनका परिवार काफी समय से एजेंसी के रडार पर था और राउत से पहले उनकी पत्नी से भी इस घोटाले के सिलसिले में पूछताछ हो चुकी है। लेकिन, संजय राउत अकेले हाई-प्रोफाइल नेता नहीं हैं, जिनकी प्रवर्तन निदेशालय के प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के सामने एक नहीं चली है। उनसे पहले कई नेता ऐसे ही आरोपों में एजेंसी के हत्थे चढ़ चुके हैं और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम ऐसे हैं, जिनपर आने वाले दिनों में सख्ती की तलवार लटकी हुई है।

    नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला

    नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला

    जिन बड़े नेताओं के नाम ईडी के रडार पर इस वक्त हैं, उनमें नेशनल कांफ्रेंस के सुप्रीमो और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी शामिल हैं। उनसे एजेंसी जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में कथित रूप से हुई वित्तीय धांधली के सिलसिले में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले को लेकर बीचे 31 मई को श्रीनगर में पूछताछ कर चुकी है। इस मामले में 84 साल के नेता 2019 में भी अपना बयान दर्ज करवा चुके हैं। हालांकि, उनकी पार्टी का कहना है कि बुजुर्ग नेता एजेंसी के अधिकारियों के साथ जांच में सहयोग करते रहेंगे।

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम पर तलवंडी साबो पावर प्रोजेक्ट के लिए चीनी वर्करों को 50 लाख रुपये की रिश्वत लेकर कथित तौर पर वीजा उपलब्ध करवाने का आरोप है। इस मामले की जांच भी ईडी के हाथों में है। चीनी नागरिकों को केंद्रीय गृह मंत्रालय से गैर-कानूनी तौर पर वीजा जारी करवाने का यह मामला यूपीए सरकार के कार्यकाल का है। तब 2011 में कार्ति के पिता पी चिदंबरम देश के गृहमंत्री हुआ करते थे। गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय के खिलाफ मोर्चा खोलने वालों में कांग्रेस की इस पिता-पुत्र की जोड़ी काफी मुखर रही है।

    टीएमसी के अभिषेक बनर्जी

    टीएमसी के अभिषेक बनर्जी

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाई-प्रोफाइल भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी के खिलाफ भी ईडी का शिकंजा कसा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय बनर्जी दंपति के खिलाफ कथित कोयला तस्करी की जांच कर रहा है। अभिषेक बनर्जी तो दो बार ईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश भी हो चुके हैं, लेकिन उनकी पत्नी बार-बार के समन के बावजूद एजेंसी से अभी तक बचती रही हैं।

    एनसीपी नेता अजित पवार

    एनसीपी नेता अजित पवार

    एनसीपी के बड़े नेता, पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके परिवार के खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच चल रही है। ईडी के मुताबिक कई बेनामी संपत्तियों के लिए गैर-कानूनी तौर पर पैसे लगाए गए, जिन्हें हाल ही में कुर्क किया गया है।

    शिवसेना नेता अनिल परब

    शिवसेना नेता अनिल परब

    शिवसेना नेता और उद्धव के खास अनिल परब पर भी ईडी की जांच की तलवार लटकी हुई है। एजेंसी उन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए उन्हें समन भेज सकती है। पिछले गुरुवार को ईडी ने उनसे जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिनमें से उनके दो घर भी शामिल हैं। इस मामले में परब पर कोस्टल रेगुलेटरी जोन के नियमों का उल्लंघन करके महाराष्ट्र की रत्नागिरि के दपोली में एक रिसॉर्ट बनाने का आरोप है। यह मामला भी मनी लॉन्ड्रिंग का है।

    कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार

    कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार

    कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच चल रही है। उनके खिलाफ 2018 में दर्ज एक मनी लॉन्ड्रिंग के केस में दिल्ली की एक अदालत ने 1 जुलाई को उन्हें तलब किया था। उन्हें उनके खिलाफ दर्ज चार्जशीट के बाद समन जारी किया गया था। इस मामले में ईडी उन्हें 3 सितंबर,2019 को गिरफ्तार भी कर चुकी है और उसी साल 23 अक्टूबर को उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट से बेल ले लिया था। उनपर करोड़ो रुपये की लेने-देन हवाला के जरिए करने के आरोप हैं।

    केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र जैन

    केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र जैन

    दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रभावी नेता सत्येंद्र जैन को ईडी ने 31 मई को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें पीएमएलए के आपराधिक धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया। सत्येंद्र जैन अभी भी गिरफ्त में हैं, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के पद से हटाया नहीं है।

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    एनसीपी नेता नवाब मलिक

    एनसीपी नेता नवाब मलिक

    एनसीपी नेता नवाब मलिक देश के शायद ऐसे पहले नेता हैं, जो जेल जाकर भी तबतक मंत्री बने रहे, जबतक कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी की सरकार गिर नहीं गई। ईडी ने उन्हें 23 फरवरी को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया था। उनपर भगोड़े आतंकी दाऊद इब्राहिम और उसके गुर्गों की गतिविधियों से संबंध रखने का आरोप है। वह अभी भी जेल में बंद हैं।

    Comments
    English summary
    Apart from Shiv Sena MP Sanjay Raut, Enforcement Directorate may tighten the noose on many opposition leaders, Farooq Abdullah, Karti Chidambaram and Ajit Pawar are big names
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